कुणाल कामरा के दावों का रेलवे ने किया फैक्ट-चेक: जानिए किन-किन झूठ की पोल खोली, आँकड़े क्या बताते हैं

झूठ फैलाने की आदत से मजबूर कथित स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने हाल में रेल दुर्घटनाओं पर कुछ भ्रामक दावे किए थे। अब उसके उन्हीं दावों की पोल खोलते हुए रेलवे ने फैक्ट चेक किया है और बताया है कि कामरा के इस प्रयास का उद्देश्य सिर्फ रेल की छवि धूमिल करना है।

रेलवे ने कामरा की वीडियो में जो आँकड़े बताए गए, उन्हें लेकर आपत्ति जताई। इसके बाद एक वीडियो भी साझा किया जिसमें आधिकारिक आँकड़ों के साथ सही तथ्य बताए गए। नीचे वीडियो में दावे और उसका फैक्टचेक देख सकते हैं।

इसके अलावा लोको पायलट्स के अत्यधिक काम और लगातार नाइट शिफ्ट्स के दावे पर रेलवे ने कहा कि HOER (Hours of Employment Regulations) कानून स्पष्ट रूप से विश्राम अवधि और कार्य समय निर्धारित करता है। ट्रैक मेंटेनर्स की हर साल 400 मौतों के दावे को भी रेलवे ने गलत बताया और कहा कि यह कई सालों का सामूहिक डेटा है और इसमें असंबंधित मौतें भी शामिल होती हैं।

पुरानी घटनाओं की सही जानकारी

कामरा ने सिग्नल फेलियर के कारण होने वाली दुर्घटनाओं का भी जिक्र किया था। इस पर रेलवे ने बताया कि 2004–14 के बीच ऐसी 1,711 घटनाएँ हुईं, जो 2023 में घटकर केवल 34 रह गईं और इस साल अब तक 10 मामले सामने आए हैं। यह भी कहा गया कि सिग्नल फेलियर से जुड़े सभी आँकड़े सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि नई पटरियों के लिए बजट घटाया नहीं गया, बल्कि 2017-18 के 8,884 करोड़ रुपए से बढ़कर 2022 में 16,558 करोड़ रुपए हो गया। साल 2023-24 में 5,950 किलोमीटर नई पटरियाँ बिछाई गईं। पूरा मामला अब सोशल मीडिया पर राजनीतिक और प्रशासनिक पारदर्शिता के बहस का केंद्र बना हुआ है।