उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन था। मंगलवार (4 अगस्त) को योगी सरकार ने विधानसभा में बड़ा अनुपूरक बजट पेश किया। इस बजट का कुल आकार 59,019.54 करोड़ रुपए है। राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच इस बजट को सदन के सामने रखा।
इस बजट में सरकार ने खर्च के लिए दो हिस्से तय किए हैं। राजस्व खर्च के लिए 17,399.50 करोड़ रुपए रखे गए हैं। वहीं पूँजी खर्च के लिए 41,620.04 करोड़ रुपए का प्रस्ताव है। जब यह बजट पेश हो रहा था, तब समाजवादी पार्टी के विधायक लगातार हंगामा कर रहे थे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि आप लोगों को कुछ अच्छी बातें भी सीखकर आनी चाहिए।
अनुपूरक बजट में क्या खास है और किसे कितना पैसा मिला?
योगी सरकार ने इस बजट में अलग-अलग विभागों के लिए बहुत सारा पैसा दिया है ताकि राज्य का विकास तेजी से हो सके। इसमें नई जरूरतों के लिए 7,854.25 करोड़ रुपए के प्रस्ताव भी जोड़े गए हैं। उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भारी और मध्यम उद्योगों को 22,107.88 करोड़ रुपए मिले हैं। गाँवों के विकास के लिए 17,942.73 करोड़ रुपए और बिजली विभाग के लिए 7,422.27 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है।
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के लिए 2,025 करोड़ रुपए और समाज कल्याण विभाग के लिए 1,655 करोड़ रुपए दिए गए हैं। महिलाओं के कल्याण के लिए 1,094.40 करोड़ रुपए और सड़कों के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग को 700.01 करोड़ रुपए मिले हैं। इन पैसों से जनता से जुड़े कई रुके हुए काम पूरे किए जाएँगे।
आगामी चुनावों को साधने के लिए सरकार की खास सौगातें
आने वाले चुनावों को देखते हुए योगी सरकार ने इस बजट में कई खास तोहफे देने की तैयारी की है। योगी सरकार का इरादा पुरानी योजनाओं को आगे बढ़ाने के साथ कुछ नई घोषणाएँ करने का भी है। इस बजट के जरिए आँगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का वेतन या मानदेय बढ़ाया जा सकता है। राज्य के वकीलों को भी योगी सरकार की तरफ से मुफ्त या कैशलेस इलाज की सुविधा मिल सकती है।
किसानों के बच्चों के लिए चल रही मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना की राशि दो हजार रुपए बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए भी इस बजट में अलग से पैसा रखा गया है। होनहार छात्राओं को मिलने वाली स्कूटी की रकम को भी बढ़ाया जा सकता है, जिसके लिए पहले फरवरी के बजट में 400 करोड़ रुपए तय किए गए थे। इसके साथ ही वीबी-जीरामजी योजना और मनरेगा के बचे हुए पैसों के भुगतान के लिए भी इस बजट में पूरा इंतजाम किया गया है।
क्या होता है अनुपूरक बजट और क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 205 के नियमों के अनुसार जब साल के शुरुआत में पास किया गया मूल बजट खर्चों के लिए कम पड़ने लगता है, तब अनुपूरक बजट लाया जाता है। इसके अलावा जब किसी नए काम या योजना के लिए अचानक पैसों की जरूरत होती है, तो उसे प्रतीक माँग के रूप में विधान-मंडल के सामने रखा जाता है।
वित्त विभाग के बड़े अधिकारी और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने 4 अगस्त 2026 को यह आधिकारिक प्रस्ताव जारी किया है। सरकार का यह मानना है कि इस बजट से किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों की पुरानी योजनाएँ समय पर पूरी होंगी और विकास के कामों में कोई रुकावट नहीं आएगी।
योगी सरकार का साफ कहना है कि यह बजट किसानों, महिलाओं, युवाओं और गरीबों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मंत्रियों का मानना है कि इससे पुरानी योजनाएँ समय पर पूरी होंगी और जनता के विकास के कामों में कोई रुकावट नहीं आएगी।
बजट पेश होने से पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं ने विधानसभा के बाहर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव के साथ कई विधायक हाथ में दान पात्र, खाद के बोरे और साइकिल लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाने पहुँचे।
सदन के अंदर भी समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सरकार पर बहुत तीखे हमले किए। सपा नेताओं का आरोप था कि सरकार अपने पहले वाले मुख्य बजट का ही आधा पैसा खर्च नहीं कर पाई है। उनका कहना था कि जब पुराना पैसा ही खर्च नहीं हुआ, तो यह नया बजट लाने का कोई मतलब नहीं है और यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगा।

