देश के सभी प्रमुख हवाईअड्डों पर पहली बार एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। यह फैसला हाल के महीनों में सैन्य गतिविधियों में ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल, खासकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद लिया गया है, जिसमें ड्रोन नई पीढ़ी के युद्ध में महत्वपूर्ण साबित हुए। गृह मंत्रालय (MHA) की देख रेख में चल रहे इस प्रोजेक्ट पर कई उच्च स्तर की बैठकें हो चुकी हैं। ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने एक समिति बनाई है जिसमें DGCA, CISF और अन्य एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, सिस्टम की तकनीकी स्पेसिफिकेशन तैयार की जा रही हैं। इनके फाइनल होते ही देशभर के एयरपोर्ट ऑपरेटरों को आवश्यक एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी खरीदने और इंस्टॉल करने का निर्देश दिया जाएगा। प्रोजेक्ट को चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें दिल्ली, मुंबई, श्रीनगर और जम्मू जैसे संवेदनशील हवाईअड्डों को प्राथमिकता मिलेगी। बाद में इसे अन्य एयरपोर्ट्स तक भी बढ़ाया जाएगा।
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान ड्रोन तकनीक का व्यापक उपयोग देखा गया। पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा के पास ड्रोन देखे जाने और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कई को मार गिराने के बाद सरकार ने एयरपोर्ट सुरक्षा को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।

