छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में मंगलवार (25 नवंबर 2025) को नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता मिली। 28 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें 19 महिलाएँ शामिल हैं। इनमें से 22 नक्सलियों पर कुल 89 लाख रुपए का इनाम घोषित था।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के ये कैडर वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष सरेंडर हुए। इस सरेंडर से दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी को बड़ा झटका लगा है।
IG पट्टिलिंगम ने कहा, “ये नक्सली राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लनार’ योजना, नई आत्मसमर्पण-पुनर्वास नीति और ‘पूना मरघम’ (सामाजिक एकीकरण) से प्रभावित हुए।” नियाद नेल्लनार योजना दूरदराज गाँवों में विकास लाने का प्रयास है, जबकि पूना मरघम बस्तर पुलिस की पुनर्वास पहल है।
आत्मसमर्पण करने वालों में चार कट्टर कैडर प्रमुख हैं: पंडी ध्रुव उर्फ दिनेश (33 वर्ष, डिवीजनल कमेटी सदस्य), दुले मंडावी उर्फ मुन्नी (26), छत्तीस पोयम (18) और पदनी ओयम (30)। ये तीनों पूर्वी बस्तर डिवीजन की सैन्य कंपनी नंबर 6 के सदस्य थे। इन सभी पर 8-8 लाख रुपए का इनाम था।
अन्य अपराधी लखमू उसेंडी (20), सुकमति नुरेती (25), सकीला कश्यप (35), शम्बत्ती शोरी (35), चैते उर्फ रजिता (30) और बुधरा रावा (28) हैं, जो एरिया कमेटी सदस्य थे। इन पर 5-5 लाख का इनाम था। IG ने बताया कि दिनेश, लखमू और सुकमति ने एक सेल्फ लोडिंग राइफल (SLR), एक INSAS राइफल और एक .303 राइफल सौंपी।
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुरिया ने कहा, “इस साल जिले में कुल 287 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके।” उन्होंने आगे जोड़ा, “पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी, केंद्रीय समिति के रामदार, दंडकारण्य के पप्पा राव, बरसे देवा जैसे वरिष्ठों के पास अब हिंसा छोड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं। माओवादी विचारधारा का अंत निकट है।”

