दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए धमाके को लगभग तीन हफ्ते बीत चुके हैं। ब्लास्ट मामले में जाँच एजेंसियाँ तेजी से काम कर रही हैं। जाँच का केंद्र अब फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी बन गई है। इस यूनिवर्सिटी में धमाके के आरोप में पकड़े गए तीन लोग काम करते थे। एजेंसियों ने अब तक यूनिवर्सिटी के 48 स्टाफ सदस्यों से पूछताछ की है। जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि मुख्य आरोपित उमर नबी धमाके से पहले किन लोगों से मिला और कहाँ गया था।
अपराधियों का यूनिवर्सिटी का कनेक्शन
जानकारी के अनुसार, धमाके के आरोप में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मॉड्यूल के तीन सदस्य अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी करते थे। मुख्य आरोपित उमर नबी के अलावा, पहलगाम का डॉ मुजम्मिल गनई और लखनऊ की डॉ शाहीन शाहिद अंसारी यहीं काम करते थे। बाकी गिरफ्तार आरोपितों में सहारनपुर के डॉ अदील राथेर और मुफ्ती इरफान वागे शामिल हैं।
हाल ही में, जाँच एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी के एक वार्ड बॉय शोएब को भी फरीदाबाद से पकड़ा था। उस पर आरोप है कि उसने धमाके से पहले आंतकी उमर को सामान पहुँचाने में मदद की थी और अपने यहाँ किराए पर कमरा दिया था।
जाँच का दायरा बढ़ा: विदेशी डिग्री वाले डॉक्टर भी निशाने पर
जाँच सिर्फ अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों तक भी पहुँच गई है। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे डॉक्टरों का रिकॉर्ड माँगा है, जिन्होंने बांग्लादेश, यूएई, चीन या पाकिस्तान से MBBS की डिग्री ली है और दिल्ली में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
एजेंसियों को शक है कि उमर का नेटवर्क सिर्फ अल फलाह तक नहीं था। वे एक बड़ा पेशेवर नेटवर्क खंगाल रहे हैं जो इस मामले से जुड़ा हो सकता है। फिलहाल, यह जाँच शुरुआती दौर में है।

