गोरखपुर के विश्वप्रसिद्ध और सबसे बड़े धार्मिक ग्रंथों के प्रकाशक गीता प्रेस के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) ने सेक्टर-27 में गीता प्रेस को 10 एकड़ जमीन आवंटित की है। यह आवंटन GIDA के स्थापना दिवस पर किया गया। संस्था वर्षों से इस मौके का इंतजार कर रही थी।
Gorakhpur
— The Uttar Pradesh Index (@theupindex) November 29, 2025
Gita Press has been allotted 10 acres land in Sector-28, GIDA
World’s largest publisher of religious books, Gita Press will invest ₹81 crores here for a new printing facility creating 300+ new jobs. pic.twitter.com/FEYK84ev9V
जगह की कमी से जूझ रहा था प्रेस
गीता प्रेस के मैनेजर डॉ लाल मणि तिवारी ने बताया कि प्रेस लंबे समय से जगह की कमी से परेशान था। वर्तमान में प्रेस के पास करीब 1.45 लाख वर्ग फीट जमीन है जो पूरी तरह उपयोग में है और इसी वजह से उत्पादन बढ़ाना मुश्किल हो रहा था।
उन्होंने कहा कि जमीन मिलने की खबर सुनकर सभी बेहद खुश हैं क्योंकि इससे उत्पादन क्षमता बढ़ सकेगी और बढ़ती माँग को पूरा किया जा सकेगा।
81 करोड़ निवेश और 300 रोजगार की उम्मीद
नए परिसर में गीता प्रेस लगभग 81 करोड़ का निवेश करेगी और इससे करीब 300 रोजगार अवसर पैदा होंगे। फिलहाल संस्था प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़ पुस्तकें छाप रही है, लेकिन माँग इससे कहीं ज्यादा है। यहाँ तक कि अपनी ही 20 शाखाओं तक भी पर्याप्त पुस्तकें भेज पाना मुश्किल हो रहा है, इसलिए यह विस्तार धार्मिक पुस्तकों की बढ़ती माँग को पूरा करने में मदद करेगा।
अगले 100 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना
नई जमीन पर काम शुरू करने के लिए संस्था के पास 4 साल का समय है, लेकिन गीता प्रेस कोशिश कर रहा है कि जल्द से जल्द उत्पादन प्रारंभ हो सके। सबसे पहले जमीन का रजिस्ट्रेशन, बाउंड्री वॉल निर्माण और फिर मशीनरी लगाने का काम होगा। डॉ तिवारी का कहना है कि यह विस्तार केवल आज की जरूरत के लिए नहीं बल्कि अगले 100 वर्षों की माँग को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
भक्ति और अनुशासन के बीच काम करने वाली संस्था
गोरखपुर में गीता प्रेस का महत्व गोरखनाथ मंदिर जितना ही माना जाता है। प्रेस के अंदर माहौल किसी मंदिर जैसा होता है। अंतिम बाइंडिंग प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी जूते-चप्पल उतार देते हैं ताकि धार्मिक ग्रंथों का सम्मान बना रहे। यहाँ एक सुंदर कला गैलरी भी है जिसका उद्घाटन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने किया था।
15 भाषाओं में 1,848 पुस्तकें प्रकाशित होती हैं
गीता प्रेस वर्तमान में 15 भाषाओं में 1,848 प्रकार की पुस्तकें प्रकाशित करता है। प्रतिदिन लगभग 70,000 पुस्तकें छपती हैं जबकि माँग लगभग 1 लाख प्रतिदिन की है। हर माह करीब 500 टन कागज उपयोग होता है और जापान, जर्मनी और इटली से लाई गई उन्नत मशीनों पर काम होता है।
पुस्तक के कवर मशीनों की जगह हाथ से लगाए जाते हैं क्योंकि मशीनों में प्रयुक्त गोंद में पशु वसा होती है और धार्मिक भावनाओं के चलते गीता प्रेस इसका उपयोग नहीं करता।
डिजिटल पहुँच भी बढ़ा रहा है गीता प्रेस
अब तक गीता प्रेस 100 करोड़ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित कर चुका है, जिसमें लगभग 18.75 करोड़ गीता और 13.25 करोड़ रामचरितमानस और तुलसीदास साहित्य शामिल हैं। डिजिटल रूप से भी संस्था अपनी पहुँच बढ़ा रही है।
गीता प्रेस की वेबसाइट पर लगभग 500 पुस्तकें मुफ्त उपलब्ध हैं और भविष्य में सभी पुस्तकों को निशुल्क करने की योजना है। साथ ही ‘Gita Seva’ ऐप के माध्यम से भी कई भाषाओं में धार्मिक ग्रंथ इंटरनेट पर बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध हैं।
कुल मिलाकर, GIDA की ओर से जमीन आवंटन गीता प्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि धार्मिक ग्रंथों की उपलब्धता, तकनीकी विस्तार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यह कदम गीता प्रेस को आने वाले कई दशकों तक पाठकों की धार्मिक और आध्यात्मिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बनाएगा।

