मणिपुर के नागाओं ने विदेशी कुकियों की घुसपैठ पर PM को लिखा पत्र, कहा- हमारी जमीनों पर हो रहा कब्जा: अफीम खेती से खतरे में सांस्कृतिक पहचान

मणिपुर की चार नागा जनजातियों ने गुरुवार (4 दिसंबर 2025) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य में म्यांमार से हो रही कुकी जनजाति की अवैध घुसपैठ पर तुरंत कार्रवाई की माँग की।

जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने कहा कि पिछले कुछ सालों में मणिपुर में म्यांमार जैसे युद्धग्रस्त देश और उन भारतीय राज्यों से अवैध घुसपैठ बढ़ी है, जहाँ NRC लागू किया जा रहा है।

परिषद के मुताबिक, यह लगातार बढ़ती आबादी स्थानीय संसाधनों पर भारी दबाव बना रही है और राज्य की मूल जानजाती समुदायों की सांस्कृतिक पहचान, आर्थिक हालात और पारंपरिक रोज़गार के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

खासतौर पर बड़े हाईवे के किनारे बिना रोक-टोक नई बस्तियाँ बसती जा रही हैं। परिषद ने यह भी आरोप लगाया कि म्यांमार से आए कई कुकी लोग बड़े पैमाने पर पोपी (अफीम) की खेती कर रहे हैं और उन्हें हथियारबंद उग्रवादी समूहों का संरक्षण मिल रहा है।

परिषद ने बताया कि ये समूह राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले व्यावसायिक वाहनों से अवैध वसूली करते हैं और आदिवासी नागा लोगों की जमीन पर बड़े पैमाने पर पोपी (अफीम) की खेती करके अपना नेटवर्क चला रहे हैं। इनके कारण पर्यावरण, क्षेत्रीय स्थिरता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा सभी पर खतरा बढ़ गया है।

अवैध घुसपैठ और तेजी से बदलते जनसांख्यिकीय बदलाव का जिक्र करते हुए नागा जनजातियों ने कहा, “ये लोग अब नागा समुदाय की पुश्तैनी जमीनों पर अपना दावा ठोक रहे हैं और अलग प्रशासन की माँग कर रहे हैं। हमारी अनुमति के बिना सड़कें बनाई जा रही हैं, ताकि उनकी नई बस्तियों को जोड़ने वाले इंटर-विलेज रास्ते सीधे हमारे नागा गाँवों से होकर गुजरें।”

नागा जनजातियों ने आगे बताया कि मणिपुर में उनका समुदाय अब डर और अनिश्चितता में जी रहा है और वे अपनी ही जमीन पर शरणार्थियों जैसी स्थिति में पहुँच गए हैं।

जॉइंट ट्राइब्स काउंसिल मणिपुर ने यह भी डेटा साझा किया, जिसमें दिखाया गया है कि राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में कुकी-चिन समूहों की हिस्सेदारी तेजी से और असामान्य रूप से बढ़ी है।