उमर खालिद के खिलाफ शरजील इमाम का भाषण भी सबूत: सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली पुलिस ने बताया, दिल्ली दंगों में जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 दिसंबर 2025) को दिल्ली दंगों के बड़े साजिश मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शादाब अहमद और मोहम्मद सलीम खान की जमानत याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जस्टिस अरविंद कुमार और एनवी अंजरिया की बेंच ने सुनवाई पूरी कर ली।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से एएसजी एसवी राजू ने दलील दी कि एक साजिशकर्ता के कृत्यों को दूसरे पर थोपा जा सकता है। उन्होंने कहा, “शरजील इमाम की स्पीच को उमर खालिद पर थोपा जा सकता है। शरजील इमाम का केस दूसरे आरोपितों के खिलाफ सबूत बनेगा।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “दोनों पक्षों के वकीलों ने काफी लंबी बहस की है और अधिकारियों, मेमो, शॉर्ट सिनॉप्सिस, लॉन्ग सिनॉप्सिस, लिखित दलीलें, चार्ट, तारीखों की सूची, घटनाओं की सूची आदि पेश किए हैं। सुविधा के लिए इन्हें रिकॉर्ड पर लिया गया है। अब हम वकीलों से कहते हैं कि इन दस्तावेजों को एकत्रित, संकलित और एक ही सुविधाजनक संकलन में संकलित करें। यह प्रतिवादी पक्ष के वकीलों पर भी लागू होगा। यह काम 18 दिसंबर तक पूरा करें ताकि छुट्टियों से पहले हम फैसला ले सकें।”

यह मामला फरवरी 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। पुलिस का आरोप है कि आरोपित नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ साजिश रचकर दंगे भड़काने वाले थे। एफआईआर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईपीसी और यूएपीए के तहत दर्ज की थी। उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में हैं। उसे इस साजिश मामले में जमानत नहीं मिली है।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने हलफनामा देकर कहा कि दस्तावेजी और तकनीकी सबूत ‘रेजीम चेंज’ साजिश के हैं, जिसमें सांप्रदायिक दंगे भड़काने और गैर-मुस्लिमों को मारने की योजना थी। दिल्ली पुलिस ने आरोपितों को राष्ट्र-विरोधी बताते हुए कहा कि ये लोग हिंसा के माध्यम से सरकार (सत्ता) को उखाड़ना चाहते थे।

एएसजी राजू ने कहा, “आरोपित ट्रायल में देरी का बहाना न बनाएँ। आरोपित कह नहीं सकते कि और सबूत आने दो फिर आरोपों पर बहस करेंगे। अगर और सबूत आए तो आरोप संशोधित कर सकते हैं। सबूत न होने पर डिस्चार्ज हो सकता है, लेकिन सबूत आने तक आरोपों पर बहस न करने का बहाना नहीं चलेगा।”

दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि उमर ने जानबूझकर दंगों से पहले दिल्ली छोड़ी। पुलिस ने कहा, “दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप में उमर एडमिन था, मैसेज भेज सकता था। 11 मार्च के बाद सिग्नल पर शिफ्ट हुए।” 2016 एफआईआर को साजिश का हिस्सा बताया। कोर्ट ने यूएपीए की धारा 15 पर सवाल किया और पूछा कि स्पीच से एक्शन कैसे जोड़ सकते हैं। इस पर राजू ने कहा, “स्पीच प्लानिंग दिखाती है। साजिश पेट्रोल बम इस्तेमाल की थी, जो इस्तेमाल हुए। साजिश ने कई घटनाएँ भड़काईं।” पुलिस ने कहा कि उमर मीटिंग्स में सक्रिय था, मिनट-दर-मिनट अपडेट लेता था।