भारत बेहद विश्वसनीय साझेदार, PM मोदी के आने से बढ़ेगा द्विपक्षीय व्यापार: ओमान के राजदूत ने की हिंदुस्तान की तारीफ, रक्षा संबंधों को अहम बताया

ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अब्दुल्ला सालेह अलशिबानी ने भारत की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत, ओमानी निवेशकों के लिए बेहद संभावनाओं वाला बाजार बन चुका है।

बता दें कि अगले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा पर जाएँगे। इस यात्रा में वह जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान का दौरा करेंगे।

भारत–ओमान आर्थिक रिश्ते और निवेश की संभावनाएँ

ओमान के राजदूत अलशिबानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी जॉर्डन और ओमान दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि भारत और ओमान के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक समझौता (FTA) निवेश को आसान बनाएगा और द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत आधार प्रदान करेगा।

राजदूत के अनुसार, हालिया वर्षों में भारत–ओमान व्यापार तेजी से बढ़ा है और दोनों देश एक-दूसरे के लिए विश्वसनीय आर्थिक साझेदार बनकर उभरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था ओमानी निवेशकों के लिए नए अवसर खोल रही है।

रक्षा सहयोग: सभी सेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण

रक्षा सहयोग पर बात करते हुए अलशिबानी ने कहा कि भारत और ओमान के बीच इतने गहरे रक्षा संबंध हैं कि ओमान वह पहला देश है जिसने भारत की तीनों सेनाओं के साथ संयुक्त प्रशिक्षण करवाया। यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसे की गहराई का प्रमाण है।

प्रधानमंत्री मोदी के ओमान दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र में कई और समझौते होने की संभावना जताई जा रही है। मध्य पूर्व में भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से ओमान को एक अहम साझेदार माना जाता है।

चीन की कोशिशें और ओमान का रणनीतिक महत्व

चीन के पास ओमान में कोई आधिकारिक नौसैनिक अड्डा नहीं है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने डुकम बंदरगाह के उपयोग की इच्छा जाहिर की है। इस बंदरगाह से जुड़े इंडस्ट्रियल जोन में चीन का भारी निवेश है, जिससे अमेरिका और भारत दोनों की चिंता बढ़ी है।

हालाँकि, चीनी नौसैनिक पोत एंटी-पायरेसी और अन्य गतिविधियों के लिए ओमान में रुकते हैं, लेकिन उन्हें कोई स्थायी बेस की अनुमति नहीं है। इसी बीच, खबरें हैं कि ओमान ने भारत को अपनी नौसैनिक जरूरतों के लिए एक बंदरगाह उपयोग करने की सुविधा दी है, जो क्षेत्रीय संतुलन में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।