मोदी सरकार देगी MGNREGA के और लाभ, 100 की जगह 125 दिन मिलेगा काम: योजना का नाम ‘पूज्य बापू’ करने पर चल रहा विचार

केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को इस बदलाव से जुड़े संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके तहत, ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन की जा सकती है। इसके साथ ही, सरकार इस कानून का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ करने पर भी विचार कर रही है।

क्यों बढ़ाई जा रही है काम की सीमा?

मनरेगा कानून में हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन काम देने की गारंटी है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। वित्त वर्ष 2024-25 में एक परिवार को औसतन सिर्फ 50 दिन का ही रोजगार मिल पाया, यानी तय गारंटी का आधा भी नहीं।

सरकारी आँकड़े बताते हैं कि पूरे 100 दिन का काम पाने वाले परिवारों की संख्या बहुत कम है। पिछले साल केवल 40.70 लाख परिवार ही यह सीमा पूरी कर पाए थे, जबकि इस साल अब तक सिर्फ 6.74 लाख परिवार ही 100 दिन तक पहुँच सके हैं। इससे साफ है कि कानून में जो वादा है और गाँवों में जो काम मिल रहा है, उसके बीच बड़ा अंतर है।

इसी वजह से कई राज्य लंबे समय से काम के दिनों की सीमा बढ़ाने की माँग कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों का कहना है कि 100 दिन पर्याप्त नहीं हैं। अभी 100 दिन से ज्यादा काम देने का खर्च राज्यों को खुद उठाना पड़ता है और यही कारण है कि बहुत कम राज्य इसे लगातार कर पा रहे हैं।

मनरेगा का नाम बदलने पर विचार

सरकार मनरेगा कानून का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। प्रस्ताव है कि मौजूदा महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम किया जाए। इसके लिए कानून में बदलाव करना होगा।

इस योजना की शुरुआत साल 2005 में हुई थी, तब इसका नाम केवल राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम था। बाद में 2009 में यूपीए सरकार ने इसमें महात्मा गाँधी का नाम जोड़ दिया और तब से यह मनरेगा के नाम से जाना जाने लगा।

अगर मौजूदा एनडीए सरकार काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने और कानून का नाम बदलने का फैसला करती है, तो इसे सीधे लागू नहीं किया जा सकता। इसके लिए संसद के दोनों सदनों से संशोधन विधेयक पास कराना अनिवार्य होगा।

मनरेगा का पैमाना और भविष्य

मनरेगा एक बहुत बड़ी और लंबे समय से चल रही योजना है। इसकी शुरुआत साल 2005 में हुई थी और अब तक इस पर करीब ₹11.74 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इस योजना के तहत देशभर में 4,872 करोड़ से ज़्यादा व्यक्ति-दिन का रोजगार पैदा हुआ है, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को काम मिला है।

कोरोना महामारी के समय इस योजना की अहमियत सबसे ज़्यादा दिखी। लॉकडाउन के दौरान जब शहरों से मजदूर अपने गाँव लौटे, तब मनरेगा ही उनकी आजीविका का सबसे बड़ा सहारा बनी। वित्त वर्ष 2020-21 में रिकॉर्ड 7.55 करोड़ ग्रामीण परिवारों ने इस योजना के तहत काम लिया था।

सरकार का अब मनरेगा में बदलाव का प्रस्ताव ऐसे अहम समय पर आया है, जब छठी वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत 1 अप्रैल 2026 से योजना को आगे जारी रखने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में काम के दिन बढ़ाने और अन्य सुधारों का फैसला मनरेगा के भविष्य की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।