जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में निर्माणाधीन 850 मेगावाट की रतले जलविद्युत परियोजना को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक विवाद गहरा गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) को पत्र लिखकर बताया था कि परियोजना में कार्यरत 29 कर्मचारियों की पृष्ठभूमि संदिग्ध पाई गई है, जिनके कथित तौर पर आतंकी या आपराधिक गतिविधियों से संबंध हैं।
पुलिस के इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद भाजपा विधायक शगुन परिहार द्वारा पहले लगाए गए आरोपों को मजबूती मिली है। उन्होंने पहले भी कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल उठाए थे और अब कहा है कि पुलिस की चेतावनी उनके आरोपों की पुष्टि करती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, किश्तवाड़ के एसएसपी नरेवा सिंह ने MEIL के जनरल मैनेजर को भेजे पत्र में चेताया गया है कि ऐसे लोगों की तैनाती से परियोजना की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि जलविद्युत परियोजनाएँ रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व की होती हैं और दुश्मन देशों के लिए संवेदनशील लक्ष्य मानी जाती हैं।
पत्र में कर्मचारियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देने को कहा गया है। सूची में पाँच लोगों के आतंकी संगठनों से कथित संबंध बताए गए हैं, जबकि अन्य पर अवैध प्रवेश और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने जैसे आरोप हैं।
MEIL के COO हरपाल सिंह ने पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि कंपनी निगरानी रखेगी। गौरतलब है कि रतले परियोजना 2008 में शुरू हुई थी और अब इसे 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन लगातार विवाद और सुरक्षा चिंताओं के चलते यह फिर चर्चा में है।

