तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने आखिरकार ममता बनर्जी का साथ छोड़ने की वजह पर खुलकर बात की है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि TMC से अलग होने का फैसला पश्चिम बंगाल में पार्टी की मौजूदा स्थिति और शासन व्यवस्था को लेकर गहरी असंतुष्टि के कारण लिया गया।
उन्होंने कहा कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में कुप्रशासन, अराजकता और बेरोजगारी बढ़ी है, जिससे लोगों में नाराजगी पैदा हुई। काकोली घोष ने कहा कि बंगाल के विकास और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया।
TMC में बढ़ते असंतोष का दावा
काकोली घोष ने दावा किया कि TMC के करीब 20 सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ काम करने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि इन सांसदों ने संयुक्त रूप से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर संसद में अलग बैठने की व्यवस्था की माँग की है।
उन्होंने कहा कि यह समूह पश्चिम बंगाल और देश के विकास के लिए केंद्र सरकार तथा भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहता है। उनके मुताबिक, कानून-व्यवस्था और शासन से जुड़े मुद्दों ने इन सांसदों को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है।
‘मैं शुरू से ममता के साथ खड़ी रही, लेकिन अब बहुत सह लिया’: काकोली घोष
काकोली घोष ने कहा कि उनका राजनीतिक सफर ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हैं और लंबे समय तक ममता बनर्जी के साथ काम करती रही हैं।
उन्होंने कहा, “मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया। मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहाँ नहीं आई, मैं यहाँ 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हूँ और जैसा कि मैंने कहा ऐसे लोगों के शब्दों का मुझ पर बिल्कुल भी असर नहीं होता।”
#WATCH | Delhi: Lok Sabha MP Kakoli Ghosh says, "Mera sar katega lekin jhukega nahi… Maine bohot seh liya… I did not come here after Mamata Banerjee became Chief Minister in 2011; I have been fighting here for 40 years. And as I said, the words of such people have absolutely… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl
— ANI (@ANI) June 9, 2026
काकोली घोष ने यह भी कहा कि उनका पहला उद्देश्य बंगाल और देश के हित में काम करना है। उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि आगे क्या होता है। फिलहाल, क्या यह पर्याप्त नहीं है कि हम बंगाल के लिए, देश के लिए और भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम करना चाहते हैं? यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, राष्ट्र का मुद्दा हमारे लिए सर्वोपरि है।”
‘मुझे दरकिनार किया गया’
काकोली घोष ने कहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी ली थी। उन्हें लगा कि शायद वह अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से नहीं निभा पाईं, इसलिए उन्होंने पद छोड़ दिया।
हालाँकि इस्तीफे के बाद पार्टी नेतृत्व के रवैये से वह आहत हैं। उन्होंने कहा, “मैंने खराब नतीजों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली, यह सोचते हुए कि शायद मैंने अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभाई और इसलिए मैंने पद छोड़ दिया। इसके बाद भी मुझसे कोई मिलने नहीं आया और न ही किसी ने फोन किया। मुझे बस दरकिनार कर दिया गया।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके और अन्य असंतुष्ट सांसदों के फैसले पर किसी तरह का दबाव नहीं था। उनके अनुसार सभी सांसदों ने मिलकर अपनी रणनीति तय की और उसी के तहत लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा। काकोली घोष का कहना है कि वे राजनीतिक दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और आगे भी अपने फैसले पर कायम रहेंगी।

