बांग्लादेश में 15 साल बाद एक्टिव ISI, पाक फौजियों की बनी ‘स्पेशल सेल’: युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर तैयार कर रहे भारत विरोधी माहौल, जानें क्या है मौजूदा आंदोलन का मकसद

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद वहाँ के हालात का फायदा उठाकर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने 15 साल बाद दोबारा अपने पैर जमा लिए हैं। ढाका में पाकिस्तानी हाई कमीशन के अंदर एक ‘स्पेशल सेल’ बनाया गया है, जिसमें फौज के बड़े अफसर तैनात हैं।

इसका मकसद बांग्लादेशी युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और भारत विरोधी माहौल तैयार करना है। इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि हालिया दंगों और आगजनी के पीछे इसी सेल का हाथ है, ताकि देश में अस्थिरता पैदा कर चुनावों को टाला जा सके।

ढाका में बना ISI का ‘वॉर रूम’ और कौन हैं इसके मोहरे?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका स्थित पाकिस्तानी दूतावास में एक बेहद ताकतवर ‘ISI स्पेशल सेल’ काम कर रहा है। इस टीम में पाकिस्तान के हाई-रैंकिंग सैन्य अधिकारी शामिल हैं, जिनमें एक ब्रिगेडियर, दो कर्नल और चार मेजर के साथ-साथ नौसेना और वायुसेना के एक्सपर्ट्स भी तैनात किए गए हैं।

इस सेल को तब अंतिम रूप दिया गया जब अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान के टॉप जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने ढाका का दौरा किया और वहाँ की खुफिया एजेंसियों (NSI और DGFI) के साथ बंद कमरों में कई दौर की बैठकें कीं।

इन बैठकों का नतीजा यह निकला कि अब पाकिस्तान और बांग्लादेश मिलकर खुफिया जानकारियाँ साझा कर रहे हैं। दिखावे के लिए इसे ‘समुद्री निगरानी’ का नाम दिया गया है, लेकिन हकीकत में यह भारत की पूर्वी सीमाओं की जासूसी करने का एक अड्डा बन चुका है।

दोनों देशों ने राजनयिकों और सैन्य अधिकारियों के लिए ‘वीजा-फ्री’ एंट्री शुरू कर दी है, जिससे पाकिस्तानी जासूसों और अफसरों का बांग्लादेश में घुसना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान और कानूनी हो गया है।

युवाओं को भड़काने की साजिश और मौजूदा हिंसा में भूमिका

ISI का असली और सबसे खतरनाक मिशन है बांग्लादेशी युवाओं का ‘ब्रेनवॉश’ करना। इसके लिए ‘जमात-ए-इस्लामी’ और ‘इंकलाब मंच’ जैसे कट्टरपंथी संगठनों का सहारा लिया जा रहा है। मकसद बहुत साफ है- बांग्लादेश में एक ऐसा ‘हाइब्रिड सिस्टम’ खड़ा करना (जैसा पाकिस्तान में है), जो पूरी तरह से भारत के खिलाफ काम करे।

युवाओं के मन में कट्टरपंथ का जहर घोलकर उन्हें सड़कों पर उतारा जा रहा है, ताकि देश में लोकतंत्र की जगह धार्मिक कट्टरवाद हावी हो सके। हाल ही में 18 दिसंबर को छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद जो आगजनी और हिंसा हुई, उसे विशेषज्ञ ‘मैनेज्ड क्राइसिस’ यानी प्रायोजित संकट मान रहे हैं।

भारतीय दूतावासों पर हमले और ‘द डेली स्टार’ जैसे अखबारों के दफ्तर जलाना इसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। इस अशांति का इस्तेमाल 12 फरवरी को होने वाले चुनावों को टालने के लिए किया जा रहा है।

भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है और सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बांग्लादेशी अधिकारियों के सामने इस ‘ISI सेल’ का मुद्दा उठाते हुए साफ कर दिया है कि यह भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।