जिसे भारत ने दिलाई आजादी वो जमीन अब अल्पसंख्यकों के खून से रंगी: बांग्लादेश में हिंदू की हत्या पर भड़के पवन कल्याण, कहा- उत्पीड़न को नजरअंदाज कर रही दुनिया

जनसेना पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या पर गहरा दुख और आक्रोश जताया है। पवन कल्याण ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि जिस जमीन को 1971 में भारतीय सैनिकों ने अपने खून से आजाद कराया था, आज उसी मिट्टी पर निर्दोष अल्पसंख्यकों की हत्या हो रहा है। उन्होंने मयमन सिंह में दीपू दास को भीड़ द्वारा जिंदा जलाए जाने की घटना को इंसानियत का पतन कहा है।

पवन कल्याण ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1951 में बांग्लादेश में 22% हिंदू थे जो अब 8% से भी कम रह गए हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पलायन नहीं बल्कि अल्पसंख्यकों को चुन कर उनके साथ किया जा रहा उत्पीड़न है। इस्कॉन टेम्पल के संत चिन्मय दास की गिरफ्तारी और अब दीपू दास को पेड़ से लटकाकर जलाना यह दिखाता है कि वहाँ कानून का राज खत्म हो चुका है।

उन्होंने कहा, “इस क्षेत्र की डेमोग्राफी की सच्चाई त्रासदी का एक चौंकाने वाला सबूत है। 1951 में हिंदुओं की आबादी 22% थी जो अब घटकर 8% से भी कम हो गई है। यह सिर्फ पलायन नहीं है। यह एक व्यवस्थित उत्पीड़न है जिसे दुनिया नजरअंदाज करना चुनती है।”

उन्होंने बांग्लादेशी नेतृत्व और संयुक्त राष्ट्र (UN) से अपील की है कि वे इस दानवीय कृत्य पर केवल निंदा न करें बल्कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाएँ। पवन कल्याण ने साफ शब्दों में कहा कि भारतीय शहीदों ने शांति के लिए बलिदान दिया था, अल्पसंख्यकों के ऐसे उत्पीड़न के लिए नहीं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी को मानवाधिकारों के साथ विश्वासघात बताया।