उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी स्कूलों में अब श्रीमद्भागवत गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन से जोड़ना है।
सरकार का मानना है कि इससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा और वे मानसिक, नैतिक व सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगे। इस फैसले को राज्य की पाठ्यचर्या की रूपरेखा में भी शामिल कर लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार (21 दिसंबर 2025) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस निर्णय की औपचारिक घोषणा की।
हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के स्कूलों में गीता के श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया गया है। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है। pic.twitter.com/RbL7UE3E5w
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) December 21, 2025
सीएम ने लिखा, “हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के स्कूलों में गीता के श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया गया है। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।” मुख्यमंत्री का कहना है कि गीता के श्लोक छात्रों में कर्तव्यबोध, संतुलित सोच और सकारात्मक जीवन दृष्टि विकसित करेंगे।
शिक्षा विभाग के निर्देश: गीता के साथ रामायण भी शामिल
शिक्षा विभाग ने पहले ही शिक्षकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इन दिशानिर्देशों के तहत शिक्षकों को नियमित रूप से विद्यार्थियों को श्रीमद्भागवत गीता के चयनित श्लोकों का भावार्थ समझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि छात्र-छात्राओं को यह बताया जाए कि गीता के विचार किस प्रकार नैतिक सोच, व्यवहारिक अनुशासन, नेतृत्व गुण, सही निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक संतुलन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास में सहायक होते हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गीता के साथ रामायण को भी राज्य की शैक्षणिक पाठ्यचर्या में शामिल किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ मुकुल कुमार सती के अनुसार, राज्य पाठ्यक्रम की सिफारिशों के अनुरूप नई पाठ्यपुस्तकों को आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है।

