बिहार के किशनगंज जिले के सकोर इलाके में प्रस्तावित भारतीय सेना के आर्मी कैंप को लेकर विवाद होने लगा है। लगभग 200 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस कैंप का AIMIM के बहादुरगंज विधायक तौसीफ आलम ने खुलकर विरोध किया है।
विधायक का दावा है कि यह जमीन उपजाऊ कृषि भूमि है और इसके अधिग्रहण से सैकड़ों किसानों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। हालाँकि, उनके इस विरोध को लेकर अब कई गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, आर्मी कैंप सीमांचल जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रस्तावित है। इसके बावजूद, तौसीफ आलम ने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक ज्ञापन देकर माँग की है कि कैंप किसी दूसरी जगह बनाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर किसानों की बात नहीं सुनी गई, तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
क्या कह रहा AIMIM नेता?
विवाद तब और गहरा गया जब AIMIM नेताओं की ओर से दिए गए ज्ञापनों में कृषि भूमि के साथ-साथ ईदगाह, मस्जिद, कब्रिस्तान और रिहायशी इलाकों का जिक्र सामने आया। आलोचकों का आरोप है कि किसानों के मुद्दे की आड़ में मजहबी और सामाजिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यह विरोध जमीन का नहीं, बल्कि सेना की मौजूदगी से होने वाली परेशानीयो का है।
इसका नाम है तौसीफ़ किशनगंज से AIMIM का कंगलू विधायक ।
— मिथिला । Mithila (@The__Mithila) December 25, 2025
इसका DNA वहीं है जो कभी मुस्लिम लीग को वोट दिया लेकिन गया नहीं बिहार से पूर्वी पाकिस्तान अभी कंगलू स्थान।
इसको बस इलाज की जरूरत है आप बिल्कुल सही समझ रहे है ।#Bangladesh pic.twitter.com/2QmXzgMeUz
इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी लोकसभा में सवाल उठाया, जिससे यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ AIMIM तक नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस भी इसका विरोध कर रही है। हालाँकि आर्मी कैंप के समर्थकों का तर्क है कि सीमांचल की सामरिक अहमियत को देखते हुए यह कैंप राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल प्रशासन इस पूरे मामले की जाँच कर रहा है।

