केरल में क्रिश्चियन पेंटर की पेंटिंग के विरोध में उतरे ईसाई, लगाया मजहबी भावनाओं को आहत करने का आरोप: कोच्चि में लगाई थी प्रदर्शनी

कोच्चि-मुजिरिस बिनाले (Kochi-Muziris Biennale) प्रदर्शनी के एक हिस्से को मंगलवार (30 दिसंबर 2025) को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा। इसका कारण कुछ ईसाई संगठनों द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन था। ये संगठन वहाँ लगी एक कलाकृति का विरोध कर रहे थे।

उनका आरोप है कि इस पेंटिंग में लियोनार्डो द विंची की मशहूर पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ (The Last Supper) को गलत तरीके से दिखाया गया है। इस विवादित कलाकृति को केरल के कलाकार टॉम वट्टाकुज़ी ने बनाया है। यह पेंटिंग बाजार रोड स्थित गार्डन कन्वेंशन सेंटर में ‘एडम’ प्रदर्शनी के तहत लगाई गई थी।

सीरो-मालाबार चर्च ने इस पेंटिंग की कड़ी आलोचना करते हुए एक बयान जारी किया है। चर्च का आरोप है कि इस आर्टवर्क में ‘लास्ट सपर’ (ईसा मसीह के अंतिम भोज) के दृश्य को गलत तरीके से पेश किया गया है। चर्च ने अपने बयान में कहा, “हमें शक है कि इसे जानबूझकर प्रदर्शनी में लगाया गया है ताकि ईसाई समाज की भावनाओं को ठेस पहुँचाई जा सके।”

बता दें कि लियोनार्डो द विंची की असली पेंटिंग ‘द लास्ट सपर’ में ईसा मसीह और उनके शिष्यों के उस आखिरी भोजन को दिखाया गया है, जो उन्होंने सूली पर चढ़ने से पहले किया था। कलाकार वट्टाकुज़ी द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग पर पहले भी विवाद हो चुका है। साल 2016 में जब यह एक पत्रिका (मैगजीन) में छपी थी, तब भी भारी विरोध के बाद इसे हटाना पड़ा था।

लास्ट सपर, लियोनार्डो दा विंची की दीवार पेंटिंग, 1495–98, 1999 में इसका रेस्टोरेशन पूरा होने के बाद; मिलान के सांता मारिया डेल्ले ग्राज़ी में। ((फोटो साभार – ब्रिटानिका)

ईसाई संगठनों का आरोप है कि इस पेंटिंग से उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है और इसमें ईसा मसीह व ‘लास्ट सपर’ का अपमान किया गया है। केरल लैटिन कैथोलिक एसोसिएशन ने माँग की है कि इस पेंटिंग को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए और इसके लिए माफी माँगी जाए।

एसोसिएशन के सचिव बिजू जोसी ने सवाल उठाया कि सरकारी पैसे का इस्तेमाल ईसाई धर्म के अपमान के लिए क्यों किया जा रहा है? उन्होंने फेसबुक पर लिखा, “अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर आप सरकारी पैसे से कुछ भी नहीं दिखा सकते। क्या आप हमारे ही टैक्स के पैसे से हमारा अपमान कर रहे हैं? दुनिया की सबसे मशहूर पेंटिंग को इस तरह गलत ढंग से दिखाया गया है।” इस विवाद के विरोध में यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी कोच्चि में प्रदर्शनी वाली जगह पर धरना-प्रदर्शन किया।

दूसरी ओर, बिनाले (Biennale) प्रशासन का कहना है कि उन्होंने यह जगह किसी विवाद की वजह से नहीं, बल्कि नए साल की भीड़भाड़ को देखते हुए बंद की है। उन्होंने कहा कि नए साल के जश्न के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे, इसलिए वेन्यू को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। आयोजकों ने साफ किया कि ‘नए साल की पाबंदियों के चलते सभी वेन्यू बंद हैं और ये अब 2 जनवरी 2026 को दोबारा खुलेंगे।

आर्टिस्ट का पक्ष: यह ‘लास्ट सपर’ पर आधारित नहीं है

पेंटिंग बनाने वाले कलाकार टॉम वट्टाकुजी ने इन विरोध प्रदर्शनों को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की आस्था या भावनाओं को चोट पहुँचाने का कभी नहीं था। टॉम ने सफाई देते हुए कहा, “मेरा जन्म खुद एक ईसाई परिवार में हुआ है। मेरी ज्यादातर कलाकृतियाँ ईसाई धर्म की इंसानियत वाली सीख से प्रेरित होती हैं। यह पेंटिंग भी उसी सोच का हिस्सा है, न कि ‘द लास्ट सपर’ का बिगड़ा हुआ रूप, जैसा कि लोग आरोप लगा रहे हैं।”

अपनी पेंटिंग के बारे में समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह पेंटिंग मशहूर लेखक सी गोपन के एक नाटक से प्रेरित है, न कि ‘लास्ट सपर’ के विषय पर। उन्होंने बताया, “इसकी कहानी एक पुरानी कविता और ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है। मैं हमेशा से पुरानी कला और इंसानियत से जुड़ी आर्ट का प्रशंसक रहा हूँ।”