निशाने पर मजबूर हिंदू, ट्रेनिंग सेंटर का बहाना और ₹10000/माह तक का लालच: कोविड काल में राहत के बहाने शुरू किया ईसाई बनाने का रैकेट, कानपुर पुलिस ने 3 को किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में शनिवार (10 जनवरी 2026) को पुलिस ने संगठित धर्मांतरण रैकेट से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, रैकेट से जुड़े आरोपितों ने कोविड काल की आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर स्किल ट्रेनिंग सेंटर का बहाना बनाकर लोगों का विश्वास जीता और उनका धर्मांतरण किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जाँच टीम (SIT) का गठन किया, जिसकी जाँच के बाद ये गिरफ्तारियाँ की गईं। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार अन्य जिलों, दूसरे राज्यों और संभवतः विदेशी फंडिंग से भी जुड़े हो सकते हैं। मामले की गहन जाँच जारी है।

कैसे जीता मजबूर लोगों का भरोसा?

कोविड महामारी के दौरान कानपुर देहात में हालात बेहद खराब हो गए थे। कई परिवारों के सामने रोजगार और खाने तक की समस्या खड़ी हो गई थी। पुलिस के अनुसार, आरोपितों ने इसी मजबूरी का फायदा उठाया। उन्होंने अकबरपुर के पास एक बंद पड़े स्कूल भवन में स्किल ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया। इस केंद्र में लोगों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और छोटी-मोटी आर्थिक मदद दी जाती थी।

हालाँकि, पुलिस का कहना है कि यह सब केवल दिखावा था। असल मकसद आर्थिक रूप से कमजोर और अनुसूचित जाति के परिवारों का भरोसा जीतना था। जब लोग केंद्र से जुड़ गए, तो धीरे-धीरे वहाँ बाइबिल पढ़ना, प्रार्थना सभाएँ और बपतिस्मा जैसे धार्मिक कार्यक्रम शुरू कर दिए गए।

आरोपितों की भूमिका और गिरफ्तारी

मीडिया से बात करते हुए पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडे ने बताया कि इसके लिए एक विशेष जाँच टीम (SIT) बनाई गई। जाँच के बाद शनिवार (10 जनवरी 2026) को डेनियल शरद सिंह, पादरी हरिओम त्यागी और सावित्री शर्मा को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपित ‘नवकांति सोसायटी’ के नाम से यह केंद्र चला रहे थे। कोविड काल में उन्होंने एक बंद स्कूल भवन अपने कब्जे में लिया, जिसे बाद में ट्रेनिंग सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया गया। यहाँ सिलाई, कढ़ाई, बढ़ईगिरी, फिटर और अन्य तकनीकी कोर्स कराए जाते थे।

हैंडपंप, प्रलोभन और बपतिस्मा

जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस समूह ने गाँवों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए हैंडपंप और अन्य छोटी जरूरत की चीजें उपलब्ध कराईं। अब तक करीब 50 हैंडपंप लगाए जाने की बात सामने आई है, जिनमें से हर एक की लागत लगभग 50 हजार रुपए बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, लोगों को जोड़ने के बाद उन्हें बाइबिल पढ़ने की बैठकों और बपतिस्मा समारोहों में शामिल किया जाता था। आरोपितों का दावा था कि ये समारोह शुद्धिकरण के लिए होते हैं, जिसके बाद हिंदुओं का ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराया जाता था। पुलिस ने केंद्र से मिले दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए चलाए जा रहे क्लब

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि वे गाँव वालों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग क्लब चलाते थे। इनमें एक अहम इकाई ‘होम चर्च’ थी, जिसमें धर्मांतरित युवा अपने घरों में प्रार्थना सभाएँ कराते थे और ईसाई धर्म को गरीबी से बाहर निकलने का रास्ता बताकर पेश किया जाता था।

एक अन्य समूह ‘अवाना’ खास तौर पर बच्चों पर केंद्रित था। पुलिस को वीडियो बाइबिल रीडिंग स्कूल, वयस्क शिक्षा केंद्र और सिलाई प्रशिक्षण इकाइयों के सबूत भी मिले हैं, जिनके जरिए लक्षित लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखा जाता था।

नीबौली गाँव के निवासी राम भरोसे की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। यह मामला उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

धर्मांतरण के बदले मासिक भुगतान

FIR के अनुसार, राम भरोसे ने बताया कि युवाओं को केंद्र तक लाने के बदले उसे हर महीने 6,000 रुपए देने का प्रस्ताव दिया गया था। महिलाओं को सिलाई मशीन और नकद राशि का लालच दिया गया। जैसे-जैसे प्रार्थना सभाएँ नियमित होती गईं, कुछ लोगों को प्रति सत्र 200 रुपए तक दिए जाने लगे।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि धर्मांतरण के बाद कुछ लोगों को हर महीने 6,000 से 10,000 रुपए तक दिए जाते थे। धार्मिक संदेश फैलाने के लिए मेमोरी कार्ड में प्रवचन और रेडियो भी बाँटे गए।

अंतरराज्यीय कड़ियाँ और आंध्र प्रदेश में पंजीकरण

पुलिस के मुताबिक, नवकांति सोसायटी आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम में पंजीकृत है। फंड के लेन-देन का पता लगाने के लिए इसके रिकॉर्ड और बैंक खातों की जाँच की जा रही है। एसपी पांडे ने बताया कि कन्नौज, मिर्जापुर और औरैया, जालौन, कानपुर नगर, फतेहपुर, झाँसी और चंदौली जैसे सीमावर्ती जिलों से जुड़े लिंक भी खंगाले जा रहे हैं।

जाँच एजेंसियाँ यह भी देख रही हैं कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े लोग राज्य के बाहर होने वाले कार्यक्रमों में भी शामिल होते थे।

तस्वीरों में विदेशी नागरिक, फंडिंग एंगल जाँच के घेरे में

SIT को ऐसी तस्वीरें भी मिली हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग बाइबिल पढ़ते नजर आ रहे हैं। कुछ तस्वीरों में कथित तौर पर विदेशी नागरिक भी दिखते हैं। शिकायतकर्ता ने विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया है। अब पुलिस इन तस्वीरों को वित्तीय रिकॉर्ड से मिलाकर पैसों के स्रोत का पता लगाने में जुटी है।

पुलिस का कहना है कि जाँच अभी जारी है और जैसे-जैसे नेटवर्क का दायरा साफ होगा, आगे और गिरफ्तारियाँ भी हो सकती हैं।