हरियाणा के फरीदाबाद स्थित आतंकी डॉक्टरों का अड्डा बनी अल-फलाह युनिवर्सिटी एक बार फिर केंद्रीय जाँच एजेंसियों के घेरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच अब निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिख रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विश्वविद्यालय परिसर की संपत्तियों को कुर्क करने की तैयारी की जा रही है।
एजेंसी को आशंका है कि कैंपस में बनी कई इमारतों के निर्माण में अवैध धन का इस्तेमाल हुआ है। ED की जाँच में यह सामने आया है कि फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय के भवनों के लिए जिन पैसों का उपयोग किया गया, उनका स्रोत संदिग्ध हो सकता है।
एजेंसी को शक है कि यह धन अपराध से अर्जित आय का हिस्सा है, जिसे वैध दिखाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में निवेश किया गया। इसी आधार पर संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। फिलहाल कुर्की की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन जाँच अंतिम चरण में है।
दिल्ली ब्लास्ट की घटना के बाद बढ़ी जाँच
10 नवंबर 2025 को राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम ब्लास्ट के बाद से ही अल-फलाह समूह जाँच एजेंसियों के रडार पर है। इस घटना के बाद सुरक्षा और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई मामलों की पड़ताल शुरू हुई, जिसमें समूह से जुड़े कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन भी सामने आए। इसके बाद ED ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े ट्रस्ट की गतिविधियों की गहन जाँच शुरू की।
गिरफ्तारी, आरोप और आगे की कार्रवाई
इस मामले में अल-फलाह समूह के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को पिछले साल नवंबर में ED ने गिरफ्तार किया था। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। एजेंसी का आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े कुछ शिक्षण संस्थानों ने बिना वैध मान्यता के छात्रों से फीस वसूली और उस धन का इस्तेमाल अन्य गतिविधियों और संपत्तियों के निर्माण में किया गया।

