ईरान में भड़की हिंसा और बिगड़ते हालातों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों को बचाने के लिए ‘ऑपरेशन स्वदेश’ का शंखनाद कर दिया है। सरकार ने वहाँ फँसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष विमानों का इंतजाम किया है, जिसकी पहली उड़ान शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को तेहरान से नई दिल्ली पहुँचेगी। इस अभियान का सबसे बड़ा मकसद वहाँ पढ़ रहे हजारों मेडिकल छात्रों और पेशेवरों को बिना किसी नुकसान के घर वापस लाना है।
करीब 10 हजार भारतीयों को लाने की चुनौती
जानकारी के अनुसार, ईरान में इस वक्त लगभग 10,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें छात्र, व्यापारी और पेशेवर लोग शामिल हैं। सबसे बड़ी चिंता मेडिकल की पढ़ाई कर रहे उन 2,500 से 3,000 छात्रों की है, जो वहाँ की अलग-अलग यूनिवर्सिटीज में फँसे हैं।
हालात की गंभीरता को देखते हुए विदेश मंत्रालय ने न केवल नई यात्राओं पर रोक लगाने की सलाह दी है, बल्कि वहाँ मौजूद लोगों को बेहद सतर्क रहने को कहा है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के मुताबिक, सभी छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है ताकि निकासी में कोई देरी न हो।
दूतावास की सक्रियता और जरूरी निर्देश
ईरान में मौजूद भारतीय दूतावास ने युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। सभी नागरिकों से कहा गया है कि वे अपना पासपोर्ट, वीजा और जरूरी कागजात हर वक्त साथ रखें। दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ईमेल भी जारी किए हैं ताकि किसी भी मुसीबत में तुरंत संपर्क किया जा सके।
सरकार ने यह सुविधा भी दी है कि अगर ईरान में इंटरनेट बंद होने की वजह से कोई नागरिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन न कर पाए, तो भारत में मौजूद उनके परिवार वाले पोर्टल पर उनकी जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
क्यों खराब हुए ईरान के हालात?
ईरान में यह संकट अचानक पैदा हुए आर्थिक असंतोष की वजह से गहराया है। वहाँ की करेंसी ‘रियाल’ की कीमत में भारी गिरावट आई है, जिससे महँगाई आसमान छूने लगी है। इसके विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और हिंसक रूप ले चुके हैं।
सुरक्षा स्थिति इतनी नाजुक हो गई है कि विदेशी नागरिकों के लिए वहाँ ठहरना अब सुरक्षित नहीं रह गया है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन स्वदेश’ को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है।

