UP में धर्मांतरण कराने वाले मिशनरियों की ‘आतंकी जैसी’ तैयारी का खुलासा, हर महीने मिलते ₹6700: जानें- किन तीन स्तरों पर मिलती थी ट्रेनिंग

ग्रामीण इलाकों में लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले लोग किसी सामान्य प्रचारक की तरह काम नहीं करते बल्कि इन्हें पूरी योजना और सख्त ट्रेनिंग के साथ मैदान में उतारा जाता है। पुलिस जाँच में सामने आया है कि इन लोगों को पहले से सिखाया जाता है कि कैसे सबूत मिटाने हैं और गिरफ्तारी होने पर पूरी तरह चुप रहना है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इनकी सोच और काम करने का तरीका आतंकियों के जैसा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में 7 दिसंबर 2025 को ठठिया थाना क्षेत्र के करसाह गाँव में पुलिस ने बिना अनुमति बने चर्च में चल रही प्रार्थना सभा पर छापा मारा था। यहाँ धर्मांतरण कराए जाने की सूचना पर पुलिस ने पन्नालाल, उसके भाई विद्यासागर और उमाशंकर को गिरफ्तार किया। तीनों को जेल भेज दिया गया है।

SIT की जाँच में पता चला कि इन आरोपितों को केरल और आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण से जुड़ी खास ट्रेनिंग दी गई थी। ट्रेनिंग के बाद इनके बैंक खातों में हर महीने करीब 6,700 रुपए भेजे जाते थे। यह रकम नेटवर्क से जुड़े रहने और काम जारी रखने के लिए दी जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, ये लोग ईसाई धर्म के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं। पूछताछ में ये कुछ भी नहीं बताते। एसपी विनोद कुमार का कहना है कि अगर एक भी आरोपित चुप रह जाए तो पूरे नेटवर्क तक पहुँचना बेहद मुश्किल हो जाता है।

जाँच में यह भी सामने आया है कि धर्मांतरण कराने वालों को तीन स्तर की ट्रेनिंग दी जाती है। पहले संपर्क अधिकारी बनाया जाता है, जो लोगों को लालच और सुविधाएँ देकर प्रार्थना के लिए तैयार करता है। 50 से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण कराने पर चर्च बनवाया जाता है।

इसके बाद उप-पादरी की ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें चर्च संभालना और प्रचार करना सिखाया जाता है। आखिर में पादरी बनाया जाता है, जो बड़े इलाके में धर्मांतरण का पूरा नेटवर्क संभालता है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और फंडिंग की जाँच में जुटी है।