अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ग्रीनलैंड की खरीद’ का विरोध करने वाले डेनमार्क समेत 8 यूरोपियन देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया, जो बढ़कर 25 प्रतिशत किया जा सकता है। अमेरिका की इस धमकी पर यूरोपीय संघ (EU) ने करारा जवाब देते हुए जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली है।
ट्रंप की धमकी पर रविवार (18 जनवरी 2026) को EU के राजदूतों की बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में आपात बैठक की गई। इस बैठक में जर्मनी और फ्रांस समेत कई देशों ने ट्रंप की धमकियों की निंदा की और इसे ब्लैकमेल बताया। बैठक में सभी देशों ने एकजुट होक अमेरिका को कड़ा जवाब देने पर विचार किया ताकि भविष्य में ऐसे दबाव दोबारा न आ सकें।
यूरोप का ‘ट्रेड बाजूका’ हथियार
बैठक में यूरोप ने अमेरिका की टैरिफ धमकी का जवाब देने के लिए कई व्यापारिक कदमों पर विचार किया। इसमें सबसे ताकतवर कदम ‘Trade Bazooka’ (ट्रेड बाजूका) पर बात बनी। इस कानून के तहत यूरोप 93 अरब यूरो (लगभग ₹8.37 लाख करोड़) तक के जवाबी टैरिफ लगा सकता है, या फिर अमेरिकी कंपनियों को यूरोपीय मार्केट से बाहर करने जैसे कदम उठा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका पर यह टैरिफ यूरोप 06 फरवरी 2026 से लागू करने की तैयारी में है। इस मुद्दे पर 22 जनवरी 2026 को EU के शिखर सम्मेलन में दोबारा विचार करेगा। हालाँकि, एक अन्य राजनयिक ने कहा कि यूरोप ‘ट्रेड बाजूका’ को तुरंत लागू नहीं कर रहा है।
कुछ देशों ने कहा कि पहले डिप्लोमैसी और बातचीत के रास्ते से समाधार ढूँढा जाए और अगर अमेरिका अपने टैरिफ लागू करता है, तब जवाबी उपायों पर ये कदम जरूर उठाया जाएगा। यानी यूरोप ने अभी तत्काल ‘वाणिज्य युद्ध’ नहीं शुरू किया, लेकिन अपने प्रभावी उपकरण तैयार रखे हैं।
यूरोप ने ग्रीनलैंड में भेजी सेना
डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बाद यूरोप ने सिर्फ व्यापारिक तौर पर जवाब नहीं दिया, बल्कि सैन्य तैयारी की शुरुआत भी की। यूरोप के कई देशों ने साथी देश ग्रीनलैंड को सुरक्षित रखने के लिए सैनिक भेजे हैं। इसमें ब्रिटेन ने 1 सैनिक, फिनलैंड ने 2 सैनिक, नॉर्वे ने 2 सैनिक भेजे हैं।
इसके अलावा फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और नीदरलैंड भी सैनिक भेजने की तैयारी कर रहे हैं। वहीं, डेनमार्क पहले से ही अपने 150 सैनिक ग्रीनलैंड में तैनात कर चुका है।

