बांग्लादेश में चुनावी माहौल के बीच एक 23 वर्षीय हिंदू युवक को दुकान के अंदर जिंदा जलाकर मार दिए जाने की घटना सामने आई है। यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब कट्टरपंथी बयानबाजी भी खुलेआम तेज हो रही है। एक तरफ चुनावी मंचों से अल्पसंख्यकों को संसद से बाहर रखने जैसी धमकियाँ दी जा रही हैं, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर हिंसा की घटनाएँ अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
Chanchal Bhowmik Burned to Death in Bangladesh After Dipu–Khokon | Minority leaders demand building a safe Bangladesh for Hindus
— Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) January 24, 2026
Once again, an incident of burning a Hindu youth to death has occurred in Bangladesh. After Dipu Chandra Das was burned to death in Mymensingh and… pic.twitter.com/ERQVzIN5AO
मौत होने तक खड़ा रहा आरोपित
शुक्रवार (23 जनवरी 2026) की रात नरसिंदी जिले में चंचल भौमिक नाम के युवक को उसकी ही दुकान में जिंदा जला दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह रोज की तरह गैराज में सो रहा था, तभी किसी ने बाहर से शटर बंद कर पेट्रोल डाला और आग लगा दी। इसके बाद हमलावर बाहर खड़ा युवक की मौत तक सब कुछ देखता रहा, फिर फरार हो गया।
चंचल अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। पिता का पहले ही देहांत हो चुका था और उसकी कमाई से बीमार माँ, दिव्यांग बड़े भाई और छोटे भाई का गुजारा चलता था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का था, जिसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। परिवार को शक है कि यह हमला सुनियोजित था और इसके पीछे का कारण धार्मिक नफरत हो सकता है।
चुनावी मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर
एक तरफ देश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है तो दूसरी तरफ जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार, बर्गुना-2 सीट से पार्टी प्रत्याशी अफजल हुसैन ने एक जनसभा में हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। संबोधन में अफजल ने कहा कि मुस्लिम बहुल देश में गैर-मुस्लिमों को संसद में जगह नहीं मिलनी चाहिए।
हुसैन ने चोरी करने वालों के हाथ काटने जैसे दंड को सही ठहराया और कहा कि इससे अपराध खत्म हो जाएगा। संविधान को नकारते हुए नेता ने कुरान आधारित शासन की वकालत की और मजहबी कानूनों के तहत सख्त सजाओं को जायज ठहराया।

