5 साल में 5100 केस, 95% कन्विक्शन रेट और जाल में कई बड़ी मछलियाँ: मोदी सरकार ने बताया ED का कामकाज

भारत सरकार ने संसद को बताया है कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने पिछले 5 वर्षों में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 5,100 से अधिक मामले दर्ज किए हैं। जानकारी के मुताबिक, 3 फरवरी 2026 को केंद्र सरकार ने बताया कि 2020 से 2025 के बीच ईडी ने करीब 95% मामलों में सजा दिलवाई।

यह जानकारी संसद में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के एक सवाल के जवाब में दी गई। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि ED ने 2020-2021 और दिसंबर 2025 के बीच प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए 2002 के तहत जाँच के लिए 5,158 मामले रजिस्टर किए थे। हालाँकि किस राज्य में कितने मामले दर्ज हुए, इसका डेटा उनके पास नहीं था।

किस साल में कितने मामले हुए, इसकी जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि 2021–2022 में 1,116 मामले, 2020–2021 में 996 मामले सामने आए। 2023–2024 में 698 मामले और 2024–2025 में 775 मामले रजिस्टर्ड किए गए। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में दिसंबर तक 620 केस कन्फर्म हो चुके हैं।

सरकार के मुताबिक, स्पेशल कोर्ट ने अब तक 58 मनी लॉन्ड्रिंग केस में मेरिट के आधार पर फैसले दिए हैं, जिससे 55 मामले में सजा हुई है और 123 आरोपी दोषी पाए गए हैं, यानी 94.82% मामले में सजा मिली। पिछले पाँच सालों में 2021-22 में 1,116 मामले, 2022-23 में 953, 2023-24 में 698 और 2024-25 में 775 मामले दर्ज किए गए।

मंत्री ने देरी को लेकर जताई गई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आर्थिक अपराध की जाँच में तेजी लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फोरेंसिक टूल्स, मल्टीनेशनल डेटाबेस और ओपन-सोर्स जानकारी जैसी टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल करके प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।