कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने अल्पसंख्यकों द्वारा लिए गए कर्ज पर ब्याज को माफ कर दिया है। कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लागू की गई इस योजना के अधिकतम लाभार्थी मुस्लिम हैं जिसके बाद मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लग रहे हैं। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने सिद्धारमैया सरकार पर अल्पसंख्यकों को फायदा पहुँचाने और अन्य वर्गों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। बीजेपी का कहना है कि सरकार की यह नीति केवल तुष्टीकरण और वोट-बैंक की राजनीति पर आधारित है।
राज्य मंत्रिमंडल ने हाल ही में अल्पसंख्यक विकास निगम के तहत दिए गए कर्ज पर ब्याज माफ करने के लिए एक वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना साल 2013-14 से 2018-19 के बीच दिए गए करजो पर लागू होगी, जिसमें लगभग 714 करोड़ रुपए की बकाया वसूली शामिल है, जबकि कुल कर्ज राशि करीब 981 करोड़ रुपए थी।
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— DD News (@DDNewslive) February 7, 2026
बीजेपी MLC सी टी रवि ने ब्याज माफी नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अंबेडकर विकास निगम, वाल्मीकि निगम और अन्य पिछड़ा वर्ग निगमों के लाभार्थियों को समान राहत क्यों नहीं दी गई। उन्होंने इसे एक समुदाय को खुश करने की राजनीति करार दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री और हावेरी सांसद बसवराज बोम्मई ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों, गरीबों और पिछड़े वर्गों के लिए ब्याज माफी लागू की जानी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ रही हैं, मुआवजा और बीमा व्यवस्था अपर्याप्त है और राज्य की लगभग 80% आबादी आर्थिक संकट से जूझ रही है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि सरकार जनहित की बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दे रही है।

