स्पेसएक्स की स्टारलिंक बिजनेस ऑपरेशंस की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर (Lauren Dreyer) ने ब्लूमबर्ग (Bloomberg) के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ब्लूमबर्ग ने कहा था कि ईरान युद्ध से जुड़ी सुरक्षा चिंता के कारण भारत में स्टारलिंक का लॉन्च रुक गया है।
लॉरेन ड्रायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करके इस रिपोर्ट को ‘भ्रामक’ और ‘अज्ञात स्रोतों के नाम पर किया गया निराधार दावा’ करार दिया। उनके अनुसार, लॉन्च में देरी की खबरें पूरी तरह से गलत हैं और उनकी कंपनी के भारत सरकार के साथ सार्थक चर्चा चल रही है।
ड्रायर ने बताया कि स्टारलिंक ने आवश्यक नियामक और अनुपालन प्रक्रियाओं (regulatory and compliance processes) को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया है। भारत सरकार के साथ पूरी जिम्मेदार के साथ काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि स्टारलिंक ने देश के लिए एक ‘खास डिप्लॉयमेंट मॉडल’ तैयार किया है, जो देश की संप्रभुता को ध्यान में रखते हुए टेक्नोलॉजी, रेगुलेटरी और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा।
ड्रायर ने कहा कि कंपनी को सरकार से देश के दूरदराज और कम सेवा वाले क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने के लिए काफी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिल रही है। हम भारत के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और सरकार के साथ मिलकर जल्द ही देश में स्टारलिंक की सेवाएँ शुरू करने के लिए काम कर रहे हैं।
Starlink remains in active and productive discussions with the Government of India contrary to misleading stories based upon unsubstantiated claims from anonymous sources.
— Lauren Dreyer (@LaurenDreyer) June 9, 2026
We have worked with the Government through all of the required regulatory and compliance processes in a… https://t.co/BQdcDHmPaf
मामले से जुड़े जानकारों का भी कहना है कि ईरान युद्ध जैसी कोई बात नहीं है और केवल तकनीकी मंजूरी तथा स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े तकनीकी मुद्दे विचाराधीन हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के एक सूत्र ने भी कहा, “हाँ, क्योंकि तकनीकी मंजूरी और स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर एक मसला है। बाकी सब ठीक है। मुझे नहीं लगता कि ईरान युद्ध की वजह से कोई चिंता की बात है।”
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में क्या है?
9 जून (मंगलवार) को ब्लूमबर्ग ने “Starlink India Launch Hits Security Roadblock Before SpaceX IPO” (SpaceX IPO से पहले Starlink के भारत में लॉन्च में सुरक्षा संबंधी अड़चन) नाम से एक लेख छापा। इसमें दावा किया गया कि मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, भारत ने एलन मस्क की स्पेस-बेस्ड इंटरनेट सर्विस Starlink को कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने की मंजूरी देने की प्रक्रिया को रोक दिया है। इसकी वजह ईरान युद्ध में इसके सैटेलाइट टर्मिनल का इस्तेमाल है।
लेख में अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि Starlink को ऑपरेशन शुरू करने के लिए जो आखिरी मंजूरी चाहिए थी, उन्हें गृह मंत्रालय के तहत आने वाली सुरक्षा एजेंसियों ने रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मिडिल ईस्ट में संकट के दौरान स्टारलिंक टर्मिनल का इस्तेमाल किया गया था, जबकि ईरानी क्षेत्र में इस सर्विस का लाइसेंस नहीं था, इसलिए भारत को भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिका स्थित ऑपरेटर को नियंत्रित करने को लेकर चिंता है।
ब्लूमबर्ग ने बताया, “यह झटका ऐसे समय में लगा है जब SpaceX इतिहास का सबसे बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रहा है। 12 जून 2026 को Nasdaq पर लिस्टिंग के जरिए 1.75 ट्रिलियन डॉलर के वैल्यूएशन का लक्ष्य है। कंपनी के मुख्य रेवेन्यू इंजन के तौर पर Starlink उस वैल्यूएशन के लिए अहम है।”
इसमें यह भी कहा गया है कि चीन ने इस सर्विस तक पहुँच को असल में रोक दिया है, जबकि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले देश और इंटरनेट के सबसे बड़े बाजार भारत तक अब पहुँच नहीं हो पा रही है। आर्टिकल में यह भी बताया गया है कि किसी भी कमर्शियल लॉन्च (चाहे वह स्टारलिंक का हो या किसी और का) के लिए जरूरी सैटेलाइट-स्पेक्ट्रम प्राइस प्लान, इस गतिरोध की वजह से रुका हुआ है।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि भारत के टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने इसका फ्रेमवर्क तो तैयार कर लिया है, लेकिन मंजूरी के लिए इसे अभी तक यूनियन कैबिनेट के पास नहीं भेजा गया है।
ब्लूमबर्ग ने कहा, “स्टारलिंक को भारत में लगभग एक साल पहले ‘ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट’ लाइसेंस मिला था। इससे उसे समझौता करने और ऑपरेशन की तैयारी करने की इजाजत मिली, लेकिन यह लाइसेंस एक बड़ी रेगुलेटरी प्रक्रिया का सिर्फ एक पड़ाव था, जो अब रुक गई है।”
इसमें बताया गया कि स्टारलिंक ने पिछले साल सिक्योरिटी से जुड़े डेमो दिखाए थे, जिनकी जाँच एक स्पेशल सिक्योरिटी पैनल और टेलीकॉम अधिकारियों ने की थी। आर्टिकल में कहा गया है कि तब से भारतीय अधिकारियों ने और पूछताछ की है और नियमों का ज्यादा सख्ती से पालन करने की माँग की है।
ब्लूमबर्ग के अनुसार, स्टारलिंक की सिक्योरिटी मंजूरी तब तक पेंडिंग रहेगी, जब तक वह यह साफ नहीं कर देती कि अपनी ग्लोबल पहुँच और अमेरिकी मालिकाना हक के बावजूद, वह भारतीय सिक्योरिटी नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित करेगी। खासकर जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से पड़ने वाले दबाव के वक्त क्या करेगी।
आर्टिकल में लिखा है, “यह जाँच सिर्फ स्टारलिंक तक सीमित नहीं है। लोगों ने बताया कि ईरान संघर्ष के बाद भारतीय अधिकारियों ने सैटेलाइट-कम्युनिकेशन सेक्टर के प्रति ज्यादा सतर्कता बरती है। यह चिंता जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के बीच विदेशी नियंत्रण वाले कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता को लेकर व्यापक बेचैनी को दिखाती है।”
इसमें बताया गया है कि स्टारलिंक भारतीय अधिकारियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है, हलफनामे दे रही है और यह दिखा रही है कि वह क्षेत्रीय डेटा स्टोरेज मानकों का पालन करती है। कंपनी ने जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाया है, जिसमें मुंबई में एक हब और भारत में लगभग दस गेटवे शामिल हैं।
कंपनी के सीनियर अधिकारी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों से नियमित रूप से मिलते रहे हैं। हालाँकि, ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत अभी स्टारलिंक को मंजूरी देने में हिचकिचा रहा है, जब तक कि उसके सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों को सुलझा नहीं लिया जाता।
ब्लूमबर्ग के दावों का खंडन
ब्लूमबर्ग के दावों को स्टारलिंक और केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। हालाँकि यह कोई अकेली घटना नहीं है। हाल ही में इस मीडिया प्लेटफॉर्म को तब शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी जब उसने RBI को लेकर कहा था कि उसने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए 12 अरब डॉलर का सोना बेचा। बाद में ब्लूमबर्ग ने उस मनगढ़ंत लेख के लिए माफी माँगी।
(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


