अररिया में ADM ने निरीक्षण के दौरान डॉक्टर को जड़ा थप्पड़, Video आया सामने: भड़के डॉक्टरों ने कर दी हड़ताल, परेशान हो रहे मरीज

बिहार के अररिया जिले में ADM द्वारा एक डॉक्टर को थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह घटना गुरुवार (12 फरवरी 2026) को फारबिसगंज में निरीक्षण के दौरान हुई। शुक्रवार (13 फरवरी 2026) से जिले के सभी निजी डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं, जिससे निजी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जिला प्रशासन के आदेश पर छापेमारी

यह निरीक्षण जिला मजिस्ट्रेट विनोद दुहन के आदेश पर किया जा रहा था। प्रशासन ने नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी लैब की जाँच के लिए दो टीमों का गठन किया था, ताकि यह देखा जा सके कि वे नियमों के अनुसार काम कर रहे हैं या नहीं।

इनमें से एक टीम का नेतृत्व ADM डॉ रामबाबू कर रहे थे। निरीक्षण के दौरान टीम फारबिसगंज के रेफरल रोड स्थित बचपन नियो एंड चाइल्ड हॉस्पिटल पहुँची। वहाँ दस्तावेजों और सुविधाओं की जाँच के दौरान अस्पताल प्रबंधन और निरीक्षण टीम के बीच बहस हो गई।

थप्पड़ मारने के बाद निरीक्षण टीम के सदस्यों को कमरे में किया बंद

बहस के दौरान ADM डॉ रामबाबू ने डॉक्टर दीपक कुमार को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। इस पूरी घटना का वीडियो बना लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

घटना के बाद डॉक्टर के समर्थकों ने निरीक्षण टीम के सदस्यों को एक कमरे में बंद कर दिया और करीब आधे घंटे तक बाहर नहीं निकलने दिया। मामले की सूचना मिलने पर SDM और पुलिस मौके पर पहुँचे। दरवाजा खुलवाया गया और अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

डॉक्टरों की हड़ताल से बढ़ी मरीजों की परेशानी

घटना के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। अररिया, पूर्णिया और सुपौल इकाइयों की बैठकें हुईं। स्थानीय IMA पदाधिकारियों ने कहा कि डॉक्टरों का अपमान या उनके साथ मारपीट किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके विरोध में शुक्रवार (13 फरवरी 2026) से जिले के सभी निजी डॉक्टरों ने अपनी सेवाएँ बंद कर दी हैं।

इससे खासकर निजी अस्पतालों पर निर्भर मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। डॉ दीपक कुमार का कहना है कि निरीक्षण टीम ने उनके साथ बदसलूकी की और जबरदस्ती की। उन्होंने बताया कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई है। उनका कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी।

सूचना मिलने पर सिविल सर्जन डॉ केके कश्यप मौके पर पहुँचे और निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन का कहना है कि अस्पतालों की नियमों के पालन की जाँच जरूरी है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह काम सम्मानजनक तरीके से होना चाहिए। फिलहाल जिले में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित हो रही हैं।