अमेरिका की कोर्ट में खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता के दोष स्वीकार करने के बाद इस केस ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार का कहना है कि यह फैसला लंबी, थकाऊ और आर्थिक रूप से तबाह कर देने वाली कानूनी लड़ाई को खत्म करने के लिए मजबूरी में लिया गया।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निखिल गुप्ता के परिवार के करीबियों ने बताया कि यह फैसला अचानक जरूर लग सकता है, लेकिन हालात ऐसे बन चुके थे कि उनके पास कोई और रास्ता नहीं बचा था। परिवार को इस फैसले की जानकारी भी शुक्रवार (13 फरवरी 2026) को उनके वकील के जरिए ही मिली।
परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि गुप्ता पर हालात का भारी दबाव था। लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया, लगातार बढ़ते खर्च और मानसिक तनाव ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था, इसलिए गुप्ता ने किसी और का नाम लिए बिना सारी जिम्मेदारी खुद पर ले ली।
दोष स्वीकार करने से पहले क्या थी परिस्थितियाँ?
54 वर्षीय निखिल गुप्ता ने दोष स्वीकार करने से कुछ दिन पहले ही अपने परिवार से फोन पर बात की थी, लेकिन उन्होंने इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। केस लड़ते-लड़ते उनकी सारी जमा-पूँजी खत्म हो गई, जिसके चलते निजी वकील की सेवाएँ भी बंद करनी पड़ीं।
अब वे सजा सुनाए जाने की सुनवाई के लिए फिर से पैसे जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि बेहतर कानूनी मदद मिल सके। न्यूयॉर्क के मैनहैटन स्थित फेडरल कोर्ट में अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के सामने निखिल गुप्ता ने हत्या की सुपारी देने, इसकी साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश के आरोपों को स्वीकार किया।
इन सभी धाराओं के तहत उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती है। उनकी सजा पर अंतिम फैसला मई के आखिरी सप्ताह में अमेरिकी जिला जज विक्टर मारेरो सुनाएँगे।
गिरफ्तारी, प्रत्यर्पण और भारत सरकार का रुख
निखिल गुप्ता को 30 जून 2023 को प्राग में अमेरिकी अनुरोध पर चेक अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद जून 2024 में उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया, जहाँ से वह न्यूयॉर्क की ब्रुकलिन जेल में बंद हैं। परिवार का दावा है कि उन्होंने कई बार भारत के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली।
इस मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया था कि एक पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकाश यादव ने गुप्ता को पन्नू की हत्या की साजिश में शामिल किया था। हालाँकि भारत सरकार ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि विकाश यादव अब सरकारी कर्मचारी नहीं हैं।
साथ ही एक उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित करने की घोषणा की गई। निखिल गुप्ता के दोष स्वीकार करने पर विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

