कनाडा के न्याय विभाग ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जुड़े मामले में फेडरल कोर्ट से कुछ संवेदनशील सबूतों को सार्वजनिक न करने की अनुमति माँगी है। कनाडाई सरकार ने इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।
अटॉर्नी जनरल की ओर से पेश हुए संघीय वकीलों ने कनाडा एविडेंस एक्ट की धारा 38 के तहत आवेदन दाखिल किया है। उनका तर्क है कि कुछ जानकारी को सार्वजनिक करने से ‘अंतरराष्ट्रीय संबंधों और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान’ पहुँच सकता है। यह जानकारी ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट में सामने आई है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब इस मामले को लेकर भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में पहले से ही तनाव बना हुआ है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सितंबर 2023 में सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की संलिप्तता है। हालाँकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को लगातार खारिज करते हुए कहा है कि ओटावा ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत साझा नहीं किया है।
भारत के साथ साझा नहीं हुआ कोई सबूत
भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कनाडा ने भारतीय संलिप्तता के आरोपों के समर्थन में न तो कूटनीतिक माध्यमों से और न ही खुफिया चैनलों के जरिए कोई सबूत साझा किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन से पहले भी न तो ओटावा और न ही वॉशिंगटन ने निज्जर की हत्या से संबंधित कोई खुफिया जानकारी भारत के साथ साझा की थी।
'Still waiting for evidence': EAM Dr Jaishankar says India is open to probe in Hardeep Singh Nijjar case if Canada provides some proof pic.twitter.com/VuQXDxPxzT
— OpIndia.com (@OpIndia_com) November 16, 2023
G20 शिखर सम्मेलन से पहले कनाडा की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जोडी थॉमस ने अपने भारतीय समकक्षों से मुलाकात की थी, लेकिन भारतीय अधिकारियों के मुताबिक उस बैठक में भारत को अपराध से जोड़ने वाला कोई सबूत पेश नहीं किया गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने जस्टिन ट्रूडो के क्रेडिबल एलिगेशन वाले बयान को खारिज करते हुए इसे ‘विरोधाभासी’ करार दिया और कहा कि किसी भी चरण में कोई विश्वसनीय प्रमाण साझा नहीं किया गया। भारत ने बार-बार निज्जर की हत्या में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और कहा है कि यदि कनाडा उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है तो वह सहयोग के लिए तैयार है।
क्या है निज्जर की हत्या से जुड़ा पूरा मामला?
हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह इसी गुरुद्वारे का अध्यक्ष था। इस घटना के बाद भारत और कनाडा के बीच गंभीर कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
हरदीप सिंह निज्जर एक कुख्यात खालिस्तानी आतंकी था। वह भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा और भारत सरकार ने उसे वांछित अपराधी घोषित किया था। उसका जन्म पंजाब के जालंधर जिले के भार सिंहपुरा गाँव में हुआ था। कनाडा में वह गुरु नानक सिख गुरुद्वारा साहिब का अध्यक्ष था। हाल ही में भारत सरकार ने उसका नाम नामित आतंकवादियों की सूची में भी जोड़ा था।
राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने जालंधर, पंजाब में एक हिंदू पुजारी की हत्या की साजिश में भूमिका के आरोप में निज्जर पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। इस साजिश में निज्जर के नेतृत्व वाले खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) को भी आरोपित बनाया गया था। इसके अलावा, उसके खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ से भी संबंध सामने आए थे।
कनाडाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) को संदेह है कि भारत ने हत्या की साजिश को अंजाम देने के लिए गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इस्तेमाल किया हो सकता है। मई 2024 में इस मामले में चार भारतीय नागरिक अमनदीप सिंह, करणप्रीत सिंह, करण बरार और कमलप्रीत सिंह को अल्बर्टा और ओंटारियो से गिरफ्तार किया गया था।
चारों आरोपितों के खिलाफ मामला देख रही ब्रिटिश कोलंबिया प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने फेडरल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि मामला अभी प्री-ट्रायल चरण में है और इस पर प्रकाशन प्रतिबंध (पब्लिकेशन बैन) लागू है।
संवेदनशील साक्ष्यों के कुछ हिस्सों को सील करने की अनुमति माँगने के फैसले ने कानूनी और कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है, खासकर तब जब भारत लगातार कह रहा है कि कनाडा ने अपने गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई विशिष्ट और प्रासंगिक सबूत साझा नहीं किया है।

