बिहार कैडर के 2005 बैच के वरिष्ठ IPS अधिकारी और वर्तमान में बिहार में फायर एंड होम गार्ड के आईजी सुनील कुमार नायक की गिरफ्तारी पर सोमवार (23 फरवरी) को पटना की एक अदालत ने रोक लगा दी। दरअसल, आंध्र प्रदेश पुलिस की एक टीम सोमवार (23 फरवरी) सुबह तड़के पटना पहुँची थी और आईजी नायक को हिरासत में लेने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने आंध्र पुलिस की ‘ट्रांजिट रिमांड’ अर्जी को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियों का हवाला देते हुए आईजी को राहत दी है।
सुबह 6 बजे हुई कार्रवाई, कोर्ट में मिली फटकार
आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम ने सोमवार (23 फरवरी) सुबह करीब 6 बजे पटना में दबिश दी। पटना सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह के मुताबिक, आंध्र पुलिस ने इस कार्रवाई के बारे में स्थानीय पुलिस को पहले से कोई सूचना नहीं दी थी।
कोर्ट में जब ट्रांजिट रिमांड की अर्जी लगाई गई, तो जजों ने पाया कि आंध्र पुलिस के पास न तो कोई गिरफ्तारी वारंट था और न ही केस डायरी। नियमों के उल्लंघन और अधूरे दस्तावेजों के कारण अदालत ने रिमांड देने से मना कर दिया और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
वकीलों का दावा: FIR में नहीं था नाम
आईजी नायक के वकीलों का कहना है कि जुलाई 2024 में दर्ज हुई मूल FIR में सुनील नायक का नाम कहीं भी शामिल नहीं था। करीब तीन साल पुराने इस मामले में नायक का नाम अचानक जाँच के दौरान जोड़ना उनकी छवि खराब करने की साजिश है।
वकीलों ने तर्क दिया कि जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था, तब भी सांसद राजू ने नायक के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की थी। अब टीडीपी की सरकार आने के बाद इस मामले को दोबारा खोदकर पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2021 का है, जब आईजी सुनील नायक आंध्र प्रदेश में सीआईडी के डीआईजी के पद पर प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। आरोप है कि मई 2021 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सांसद (अब डिप्टी स्पीकर) के रघुराम कृष्ण राजू को राजद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
राजू का आरोप है कि पुलिस कस्टडी के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के इशारे पर आईजी नायक और अन्य अधिकारियों ने उन्हें रबर बेल्ट और लाठियों से बेरहमी से पीटा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी हार्ट सर्जरी होने के बावजूद उनके सीने पर दबाव डाला गया और उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई।

