रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने एंथ्रोपिक के बजाए डेटा कंपनी पैलेंटियर के जरिए क्लाउड का इस्तेमाल किया। पैलेंटियर अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए काम करती है। ये पहला मौका है जब सेना के सीक्रेट ऑपरेशन के लिए एआई का इस्तेमाल हुआ।
एंथ्रोपिक ने एआई क्लाउड के सैन्य इस्तेमाल पर आपत्ति दर्ज की है। कंपनी का कहना है कि वह किसी विशेष ऑपरेशन को लेकर कुछ नहीं कह रहे हैं, लेकिन हर यूजर को ‘पॉलिसी’ मानना जरूरी है। एंथ्रोपिक की टिप्पणी को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप कंपनी के साथ किए गए 200 मिलियन डॉलर यानी करीब 1800 करोड रुपए के कॉन्ट्रेक्ट को रद्द करने पर विचार कर रहे हैं। इस बीच कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मिलने वाले हैं।
AI क्लाउड का सैन्य इस्तेमाल नहीं कर सकते
कंपनी ने क्लाउड एआई के गाइडलाइंस में साफ लिखा है कि इसका इस्तेमाल हिंसा फैलाने, जासूसी करने, हथियार बनाने जैसे काम के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस पर अमेरिकी रक्षा विभाग कह रहा है कि वह किसी ऐसा ओपन एआई का इस्तेमाल नहीं करना चाहते जो उन्हें ‘युद्ध लड़ने से रोके।’
अमेरिका चाहता है कि एआई टूल्स बनाने वाली कंपनियाँ उन्हें बिना किसी कॉमर्शियल पाबंदी के एआई टूल्स उपलब्ध कराए। अमेरिका में एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई, गुगल की जेमिनी और माइक्रोसॉफ्ट की ओपन एआई भी ऐसे प्लेटफॉर्म बनाने में जुटी हुई हैं, जिसका इस्तेमाल सेना कर पाएगी। इसका इस्तेमाल फिलहाल डॉक्यूमेंट्स के विश्लेषण और रिसर्च में हो रहा है।
घने इलाकों में ‘टारगेट’ खोजना हुआ आसान
सेना के ऑपरेशन में डेटा एनालिसिस कर दुश्मन के ठिकानों की सही जानकारी देना, सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों का विश्लेषण करना, बड़ी संख्या में मिली खुफिया जानकारी को एक साथ विश्लेषण कर उसका सारांश लिखना। सैनिकों को कब कहाँ जाना चाहिए और कितने हथियार भेजना चाहिए ये बताना और घने इलाकों में टारगेट को पहचानना।
क्लॉड एक एडवांस AI चैटबॉट है। इसका इस्तेमाल कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति तक अमेरिका बहुत आसानी से रात के अँधेरे में पहुँच गया और बगैर किसी रुकावट के मादुरो और उनकी पत्नी को उठा कर वापस लौट आया। सेना के ठिकानों और हथियारों के जखीरों पर भी सटीक निशाना लगा कर पूरे ऑपरेशन को आसान बना पाया।

