मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध अब आठवें दिन में पहुँच गया है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र के कई मोर्चों पर संघर्ष तेज हो गया है, जिससे वैश्विक बाजारों, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गहरा असर पड़ा है।
इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाकों में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह ठिकानों पर नए हमलों की पुष्टि की है। इस बीच अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल साइट्स और सरकारी प्रतिष्ठानों पर भारी बमबारी जारी है।
इस बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े सैन्य हमलों की तैयारी कर रहा है। उन्होंने आने वाले ऑपरेशन को ‘सबसे बड़ा बमबारी अभियान’ बताया। उन्होंने कहा, “आज रात हम अपना अब तक का सबसे बड़ा बमबारी अभियान चलाने वाले हैं। हम ईरान के मिसाइल लॉन्चरों और उन फैक्ट्रियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाएँगे जो मिसाइलें बनाती हैं।”
ईरान पर व्यापक हमले, तेहरान में तबाही
लगातार हमलों के चलते ईरान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक ईरान में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। तेहरान और कोम सहित कई शहरों में भारी तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं।
युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी। लगातार हो रहे हमलों के कारण उनका शोक समारोह भी फिलहाल टाल दिया गया है। ईरान में नया सर्वोच्च नेता चुनने को लेकर हलचल तेज हो गई है।
इसी बीच ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने मध्य पूर्व के अरब देशों पर ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है। पहलवी ने इन हमलों को संप्रभुता का अस्वीकार्य उल्लंघन बताते हुए घोषणा की कि उन्होंने ईरानी जनता के उस जनादेश को स्वीकार कर लिया है, जो उन्हें इस्लामिक गणराज्य के पतन के बाद देश का नेतृत्व करने के लिए दिया गया है।
उन्होंने कहा, “इस्लामिक गणराज्य ने हमारे अरब पड़ोसियों को निशाना बनाया है। यह इस शासन का असली चेहरा है जिसने पाँच दशकों से क्षेत्र में रक्तपात और अराजकता फैला रखी है। यह अब समाप्त होना चाहिए।” पहलवी ने कहा है कि ईरान में मौजूदा शासन के पतन के बाद वे परिवर्तन प्रक्रिया का नेतृत्व करेंगे।
अमेरिकी का तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर रवाना
तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका ने एक और बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका अपना तीसरा विमानवाहक पोत USS George HW Bush मिडिल ईस्ट की ओर भेज रहा है, जिससे क्षेत्र में उसकी सैन्य मौजूदगी और मजबूत होगी। इसी दौरान अमेरिकी विदेश विभाग ने इजरायल को 151.8 मिलियन डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी भी दे दी है।
इस सौदे में 12,000 BLU-110A/B (1000 पाउंड) बम शामिल हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आपात स्थिति का हवाला देते हुए इस सौदे को बिना कॉन्ग्रेस की समीक्षा के मंजूरी दी।
ट्रंप ने दी ‘अनकंडीशनल सरेंडर’ की चेतावनी
युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण टैंकर यातायात करीब 90% तक घट गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव एक दिन में 8.5% बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पहुँच गया, जबकि एक हफ्ते में कीमतों में लगभग 30% उछाल दर्ज किया गया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यह युद्ध तभी खत्म होगा जब ईरान ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ करेगा। हालाँकि, व्हाइट हाउस का कहना है कि फिलहाल ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भेजने की कोई योजना नहीं है। ट्रंप ने निजी तौर पर सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों को ईरान में रणनीतिक मिशन के लिए भेजने का विचार जरूर रखा है, लेकिन इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

