नेपाल की राजधानी काठमांडू के मैतीघर मंडला में एक शख्स पिछले 10 दिनों से अन्न त्यागकर बैठा है। यह कोई बड़ा राजनीतिक मंच नहीं लगा है, न ही चुनावी सभा हो रही है, उसके हाथ में बस अपनी माँगों की एक लंबी सूची है और दावा है कि जब तक सरकार इन्हें नहीं मानती, वह अपना अनशन खत्म नहीं करेगा।
यह शख्स हैं नेपाल के राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता विनय यादव। उनकी सबसे बड़ी माँग सुनसरी के देवानगंज में हुई हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाना और सरकार के साथ हुए समझौते को लागू कराना है। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी नहीं है।
विनय यादव जिन मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे हैं, उनमें नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग, मुस्लिम आरक्षण खत्म करना, मुस्लिम आयोग को भंग करना, अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।
यही वजह है कि उनका मौजूदा आमरण अनशन सिर्फ एक स्थानीय घटना को लेकर किया जा रहा विरोध नहीं है बल्कि नेपाल की धार्मिक पहचान, राजनीति और नागरिक अधिकारों से जुड़े कई सवालों को एक साथ सामने ला रहा है।
26 जुलाई 2026 की रात सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्टानगंज में लाउडस्पीकर, डीजे और कावड़ यात्रा को लेकर विवाद के बाद हिंसा भड़क गई थी। हालात बिगड़ने पर पुलिस की कार्रवाई और गोलीबारी हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इसके बाद सरकार और पीड़ित परिवारों के बीच 7-सूत्रीय समझौता हुआ।
मृतकों को शहीद का दर्जा, परिवारों को 10 लाख नेपाली रुपए की सहायता, एक सदस्य को रोजगार, घायलों का मुफ्त इलाज और निष्पक्ष जाँच जैसे वादे किए गए। विनय यादव अब सवाल उठा रहे हैं कि इन वादों पर अमल कहाँ तक पहुँचा?
यही सवाल उन्हें मैतीघर मंडला तक लेकर आया है। लेकिन जिस व्यक्ति ने अपनी जान दाँव पर लगाकर यह आंदोलन शुरू किया है, वह आखिर कौन है? नेपाल की राजनीति में उसकी पहचान क्या है और किन-किन मुद्दों पर वह पहले भी सरकारों के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है?
चीन के सीमा अतिक्रमण से लेकर पोखरा एयरपोर्ट में भ्रष्टाचार, BRI के विरोध से लेकर मदरसा विधेयक के खिलाफ आंदोलन और नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की माँग तक, विनय यादव की राजनीतिक सक्रियता का दायरा काफी बड़ा रहा है। आइए जानते हैं कौन हैं विनय यादव और क्यों इस समय उनका आमरण अनशन नेपाल में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कौन हैं विनय यादव?
विनय यादव नेपाल के राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष हैं और राष्ट्रीय एकता अभियान नाम के नागरिक मंच के मुख्य संयोजक और नेता भी हैं।
राष्ट्रीय एकता दल और राष्ट्रीय एकता अभियान की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, विनय लंबे समय से नेपाल की संप्रभुता, सीमा सुरक्षा, सनातन धर्म की रक्षा, नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने और नागरिक अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। उनका राजनीतिक और सामाजिक अभियान सड़कों से लेकर संसद तक अलग-अलग मुद्दों को उठाने पर केंद्रित रहा है।
उनके समर्थक उन्हें ऐसे नेता के तौर पर पेश करते हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय हित और नागरिक अधिकारों से जुड़े कई आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
पोखरा एयरपोर्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आंदोलन
नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके प्रमुख आंदोलनों में पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण में भ्रष्टाचार को सामने लाने का प्रयास शामिल है। बताया जाता है कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर उन्होंने आंदोलन किया।
इसके अलावा पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू कराने के लिए भी उन्होंने लगातार दबाव बनाया। इसी तरह भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने की माँग को लेकर भी वह सक्रिय रहे हैं।
देश में आर्थिक संकट का हवाला देते हुए विनय ने सांसदों को मिलने वाले संसदीय विकास कोष के वितरण को रोकने की माँग को लेकर भी आंदोलन किया। उनके मुताबिक, आर्थिक संकट के समय इस तरह के फंड के इस्तेमाल पर सवाल उठना जरूरी है।
चीन और सीमा विवाद पर भी मुखर रहे हैं विनय
नेपाल की उत्तरी सीमा पर चीन के अतिक्रमण का मुद्दा भी विनय के आंदोलनों में प्रमुख रहा है। खास तौर पर गोरखा जिले के चुमनुब्री में रुइला पास और हुमला जिले में नेपाली जमीन पर चीनी अतिक्रमण को लेकर उन्होंने आवाज उठाई थी।
फरवरी 2022 में राष्ट्रीय एकता अभियान के नेतृत्व में काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय तक प्रदर्शन किया गया था। वहाँ हुमला में चीन के कथित अतिक्रमण को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचने के लिए ज्ञापन सौंपा गया। उनके समर्थकों का दावा है कि इस आंदोलन के बाद सरकार ने मामले की जाँच के लिए समिति बनाने की दिशा में कदम उठाया।
विनय ने भूमि प्रबंधन, सहकारी और गरीबी निवारण मंत्रालय पर भी कथित रूप से अतिक्रमित नेपाली जमीन वापस लेने और संयुक्त सीमा निरीक्षण कराने के लिए दबाव बनाया।
इसके अलावा उन्होंने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी BRI परियोजना को नेपाल के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे रद्द करने की माँग को लेकर काठमांडू में बड़ा प्रदर्शन किया। चीन से अनावश्यक हथियार खरीदने की प्रक्रिया को रद्द करने की माँग को लेकर भी उन्होंने रक्षा मंत्रालय पर दबाव बनाया। बीरगंज में चीनी नागरिकों द्वारा कथित रूप से चलाए जा रहे अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराने के लिए भी उनके आंदोलन का दावा किया जाता है।
मुस्लिम आयोग और मुस्लिम आरक्षण के खिलाफ भी आंदोलन
विनय के राजनीतिक एजेंडे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नेपाल में धार्मिक और सामाजिक नीतियों से जुड़ा है। वह मुस्लिम आयोग को भंग करने और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग को लेकर लगातार आंदोलन करते रहे हैं। उनका आरोप है कि मुस्लिम आयोग एक खास विचारधारा को बढ़ावा देता है।
इसी तरह वह मुस्लिम आरक्षण खत्म करने की माँग भी उठा रहे हैं। मौजूदा आमरण अनशन में भी यह मुद्दा उनकी प्रमुख माँगों में शामिल है।
उनके समर्थकों के अनुसार, विनय सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं की रक्षा के लिए भी लगातार अभियान चलाते रहे हैं। वह नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की माँग को लेकर नागरिक आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं।
मदरसा विधेयक से लेकर ईसाई मिशनरी कार्यक्रम तक
विनय ने मधेश प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए मदरसा विधेयक का भी विरोध किया था। उनके आंदोलन के कारण इस विधेयक को रोकने का दावा उनके समर्थकों की ओर से किया जाता है।
इसके अलावा एक टेलीविजन कार्यक्रम को बंद कराने के लिए भी उन्होंने अभियान चलाया था। उनके अनुसार, यह कार्यक्रम ईसाई मिशनरियों से जुड़ा हुआ था और इसमें चर्चित अभिनेता राजेश हमाल की जाति को लेकर सवाल उठाए गए थे। विनय ने इस कार्यक्रम का विरोध करते हुए इसे बंद कराने की माँग की थी।
मधेश प्रदेश के तत्कालीन भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री जितेंद्र सोनल पर भी विनय के समर्थकों ने आरोप लगाया था कि कमीशन के कारण उपभोक्ता समितियों का भुगतान रोका गया। विनय ने इन भुगतानों को जारी कराने के लिए आंदोलन किया था।
अब जिंदगी दाँव पर लगाकर न्याय की माँग
विनय यादव का मौजूदा आंदोलन उनके पुराने राजनीतिक और सामाजिक अभियानों से अलग है, क्योंकि इस बार उन्होंने अपनी जान तक दाँव पर लगा दी है। मैतीघर मंडला में आमरण अनशन के दसवें दिन उनकी सेहत लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।
उनका कहना है कि देवानगंज की हिंसा में मारे गए लोगों और उनके परिवारों को न्याय मिलना चाहिए और सरकार के साथ हुए सात-सूत्रीय समझौते को लागू किया जाना चाहिए। विनय के समर्थकों का कहना है कि आमरण अनशन उन लोगों का शांतिपूर्ण हथियार है, जिनकी आवाज सत्ता तक नहीं पहुँचती। वहीं, सरकार के सामने अब सवाल यह है कि एक नागरिक की जिंदगी दाँव पर लगने के बाद भी क्या वह बातचीत का रास्ता खोलेगी?


