इसके कुछ दिनों बाद 180 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर साइन किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 120 लोकसभा सांसदों और 60 राज्यसभा सांसदों के साइन वाला यह नोटिस शुक्रवार तक संसद के दोनों सदनों में जमा होने की उम्मीद है।
कहा जा रहा है कि नोटिस में CEC के खिलाफ कई आरोप हैं, जिसमें कुछ लोगों को वोटिंग के अधिकार से वंचित करना और 10 मार्च 2026 को चुनाव आयोग के मुख्यालय में TMC नेताओं के साथ कथित बुरा बर्ताव शामिल है।
एसआईआर को लेकर टीएमसी परेशान
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर से वह नाराज हैं। उन्होंने 9 मार्च, 2026 को CEC के खिलाफ बयानबाजी भी की थी। कोलकाता में SIR के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि मई के बाद जब राज्य में असेंबली इलेक्शन खत्म हो जाएँगे तो मुख्य चुनाव आयुक्त को जनता के पैरों में गिरना होगा।
उन्होंने कहा, “आप अपनी ताकत सिर्फ मई महीने तक ही दिखा सकते हैं, आप अफसरों को तब तक ही धमका सकते हैं। आपको खुद नहीं पता कि उसके बाद आप कहाँ होंगे। ज्ञानेश कुमार, आपको जनता के पैरों में गिरना होगा। हम आपको सरकार से बाहर कर देंगे।”
उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ एनफ़ोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी ईडी और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन यानी सीबीआई जैसी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने कहा, “उनके पास ED, CBI, BSF और हर एजेंसी है। फिर भी मैं कहूँगी कि आप ED और CBI को कितना भी दिखा लें, वोट के बाद सब अलविदा हो जाएगा।”
उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान गलत तरीके से सही वोटरों के नाम हटा दिए गए। धमकी भरे अंदाज में सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “आप नाम हटाकर और वोटिंग का अधिकार छीन कर वोट जीत सकते हैं, लेकिन कल दिल्ली से BJP सरकार जरूर जाएगी, तब मैं आपको घसीट कर जनता के सामने जवाब देने के लिए लाऊँगी।”
खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने साफ कहा था कि वह पश्चिम बंगाल समेत किसी भी राज्य में SIR में कोई रुकावट नहीं आने देगा। कोर्ट की यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल में SIR के खिलाफ ममता बनर्जी सरकार की चुनौती पर सुनवाई के दौरान आई।
इससे पहले बिहार में SIR के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है और चुनाव आयोग को वोटर लिस्ट को अपडेट करने का पूरा अधिकार है।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मिल चुकी है हार
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में गिर चुका है। इसे सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। इस पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोंक झोंक हुई। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला सदन पहुँचे और अपना आसन ग्रहण किया।

