कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया से बड़ी राहत मिली। अदालत ने टेरर फंडिंग से जुड़े मामले में उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ट्रायल में हो रही लंबी देरी का संतोषजनक कारण नहीं बताया जा सका।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश सुनाया। शाह को जून 2019 में NIA ने गिरफ्तार किया था और उन पर कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, हवाला के जरिए फंड जुटाने और आतंकियों के परिवारों का समर्थन करने के आरोप लगाए गए थे।
ट्रायल में देरी और सबूतों को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले में शाह का नाम NIA की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में 4 अक्टूबर 2019 को जोड़ा गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन को मजबूत करने में भूमिका निभाई, हवाला के जरिए पैसे जुटाए और एलओसी व्यापार के माध्यम से ऐसी गतिविधियों को फंडिंग दी, जिन्हें एजेंसी ने देश विरोधी बताया।
Nasrun minallahi wa fathun qareeb. After 39 years of imprisonment without conviction, today justice has taken its first step. We always had faith in the judiciary, and today that faith stands affirmed.#ShabirShahReleased pic.twitter.com/0CK6WPpnkz
— Sehar Shabir Shah (@SeharShabirShah) March 12, 2026
हालाँकि शाह ने जमानत के लिए दलील दी कि मुख्य और पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में उनका नाम नहीं था। इसके अलावा इतने लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में अत्यधिक देरी को भी उन्होंने जमानत का आधार बताया। उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि इस केस में अभियोजन पक्ष के लगभग 400 गवाह हैं, ऐसे में ट्रायल जल्द खत्म होना मुश्किल है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रायल बहुत धीमी गति से चल रहा है। अब तक 248 में से केवल 34 गवाहों की ही गवाही हो पाई है। अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष को सभी जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

