पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना 24 दिसंबर 2025 की है। उस वक्त चेलूर में महबूबी के घर पर पोती और बच्चा आए हुए थे। बच्चा मात्र 40 दिन का था। शुरू में, दादी ने परिवार वालों को बताया कि बच्चे को अचानक साँस लेने में दिक्कत होने लगी और वह मर गया।
महबूबी की बात पर यकीन करते हुए परिवार ने बिना किसी शक के बच्चे को दफना दिया। लेकिन, बच्चे की माँ को मौत को लेकर शक पैदा हुआ। पुलिस के मुताबिक बच्चे की माँ ने दादी का अजीब बर्ताव देखा था और उसे लगा कि कुछ तो गड़बड़ है। शक होने पर उसने चेलूर पुलिस स्टेशन जाकर डिटेल में जाँच की माँग करते हुए शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। जाँच के दौरान बच्चे की बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए बाहर निकाला गया और ऑटोप्सी के लिए भेजा गया। सैंपल आगे की जाँच के लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भी भेजे गए।
जाँच में तब बड़ा मोड़ आया जब FSL रिपोर्ट से पता चला कि बच्चे की मौत दम घुटने से हुई थी, न कि किसी बीमारी से। इसके बाद दादी के दावों पर सवाल उठे और उसे पूछताछ के लिए पुलिस ले गई। इस दौरान दादी ने कई बार बयान बदले, जिससे शक और गहरा गया। पुलिस ने महबूबी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पूछताछ में दादी महबूबी ने कबूला कि उसकी पोती ने हिन्दू युवक से शादी की थी। इसलिए वह पोती और उसके परिवार वालों से नफरत करती थी। गुस्से और नफरत में उसने अपनी पोती के बेटे को मार दिया। पुलिस के मुताबिक दादी महबूबी हिन्दू युवक से शादी और उसके बच्चे के जन्म से भी काफी गुस्से में थी।
जाँच करने वालों को शक है कि महबूबी ने बच्चे का घर के अंदर सोते वक्त गला घोंट दिया। जुर्म करने के बाद उसने कथित तौर पर यह कहानी फैलाकर हत्या को छिपाने की कोशिश की कि बच्चे की मौत सांस लेने में दिक्कतों के कारण हुई थी।

