लखनऊ के मशहूर इमामबाड़े में अब महिलाएँ बगैर सिर ढके नहीं जा पाएँगी। इमामबाड़ा प्रशासन के इस ड्रेस कोड का विरोध हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि मस्जिद में जाने वक्त तो समझ में आता है कि सिर ढक कर जाना चाहिए, लेकिन इमामबाड़ा में मस्जिद के बाहर सैर करने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे आदेश से उनका आना कम हो जाएगा। फिर ये ‘स्वतंत्रता के अधिकार’ का भी उल्लंघन है।
शिया समुदाय की माँग को मान गया इमामबाड़ा प्रशासन
लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़े में एंट्री के वक्त महिलाओं को सिर ढक कर जाना होगा, वरना प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इमामबाड़ा प्रशासन ने शिया समुदाय के माँग को मान लिया है।
शिया समुदाय ने कई सालों से इसकी माँग कर रहा था। हुसैनी टाइगर्स के कार्यकर्ताओं की माँग पर हुसैनबाद ट्रस्ट के सचिव एडीएम पश्चिम एचपी शाही ने मंजूरी दे दी। एसडीएम का कहना है कि बड़ा इमामबाड़ा शिया समुदाय का धार्मिक स्थल है, इसलिए समुदाय की माँग के मुताबिक महिलाओं के लिए सिर ढकना अनिवार्य कर दिया गया है।
अब जो पर्यटक यहाँ घूमने आएँगे उन्हें दुपट्टा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए टिकट काउंटर के साथ ही दुपट्टा देने के लिए भी काउंटर बनेगा।प्रवेश के वक्त ही सिर ढकने के लिए कहा जाएगा। जो महिला सिर नहीं ढकेगी, उसे प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
लखनऊ – इमामबाड़े में हिजाब को लेकर बोले मौलाना कल्बे जव्वाद
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) March 15, 2026
हर धार्मिक स्थल के कानून होते हैं… बिना हिजाब में जाने से रोकने का हमें पूरा हक है। इमामबाड़ा धार्मिक जगह,बिना सर ढके एंट्री नहीं है।
इमामबाड़ा घूमना है तो सिर ढकना पड़ेगा… धार्मिक स्थलों की परंपराओं का सम्मान… pic.twitter.com/xtPXhqESbI
इमामबाड़ा प्रशासन के फैसले पर शिया मौलाना कल्बे जव्वाद ने सही कदम करार दिया है। उनका कहना है कि हर धार्मिक स्थल के कानून होते हैं। बिना हिजाब में जाने से रोकने का हमें पूरा हक है। इमामबाड़ा धार्मिक जगह है, वहाँ बिना सिर ढके एंट्री नहीं मिलेगी।
महिलाओं को अंदर जाने से रोका जा रहा है
इमामबाड़ा में मस्जिद के अलावा भी पर्याप्त जगह है जहाँ घूमने हर धर्म-संप्रदाय के लोग जाते हैं। ऐसे में इमामबाड़ा में एक हिन्दू लड़की को प्रवेश करने से रोका गया। लड़की का दावा है कि उसे सिर ढकने के लिए कहा गया। उसे इमामबाड़े में हिजाब पहन कर आने को कहा गया।
इतना ही नहीं इमामबाड़ा घूमने के लिए गई हिन्दू लड़कियों को ‘डेथ टू अमेरिका एंड इजरायल’ लिखी जगह पर लात मारने के लिए कहा गया।
पर्यटकों पर थोपा जा रहा आदेश
कई महिला संगठनों ने इमामबाड़ा प्रशासन और हुसैनाबाद ट्र्स्ट के फैसले पर ऐतराज जताया है। इनका कहना है कि इमामबाड़ा सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं पर्यटन स्थल भी है। यहाँ मस्जिद के अलावा भी देखने के लिए बहुत कुछ है। पर्यटक इसलिए यहाँ आते हैं। ऐसे में सभी पर अपना रीति-रिवाज नहीं थोप सकते।
आली संस्था की रेनू मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार या हाई कोर्ट को पहल कर इस पर रोक लगानी चाहिए। इस तरह के फैसले महिलाओं को मध्यकालीन युग में ले जाते हैं। भारत का संविधान भी उनको इस बात की इजाजत नहीं देता है।
बज्में ख्वातीन संस्था की शहनाज सिदरत का कहना है कि इस्लाम में कहा गया है कि किसी के ऊपर कोई आदेश नहीं थोपा जा सकता। जो पर्यटक घूमने आते हैं, उन्हें गेट पर ही सिर ढकने के लिए मजबूर करना सही नहीं है। अगर कोई नहीं ढकना चाहता, तो उसकी एंट्री बैन करना गलत है।
महिलाओं का मानना है कि यहाँ दीवारों पर लोग लिख कर खराब करते हैं, उन्हें तो कोई नहीं रोकता। हर जगह गंदगी फैलाने वालों पर तो कोई एक्शन नहीं लेता। पर्यटक जो यहाँ आते हैं, उनमें से बड़ी संख्या गैर मुस्लिम होती है। उन्हें सिर ढकने के लिए मजबूर करना तानाशाही रवैया है। महिलाओं ने यह भी पूछा है कि आखिर महिलाएँ ही सिर ढक कर क्यों जाएँ?


