अमेरिकी रक्षा कॉन्ट्रैक्ट पैलंटिर टेक्नोलॉजीज ने दिखाया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चैटबॉट युद्ध और सैन्य ऑपरेशन में खुफिया विश्लेषकों की मदद कैसे कर सकते हैं।
कंपनी का कहना है कि AI की मदद से बड़ी मात्रा में सैन्य डेटा का विश्लेषण तेजी से किया जा सकता है, संभावित दुश्मन गतिविधियों की पहचान की जा सकती है और युद्ध के मैदान के लिए रणनीतियाँ सुझाई जा सकती हैं।
इस सिस्टम में क्लाउड AI चैटबॉट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे AI कंपनी अँठरोपिक ने विकसित किया है। हालाँकि, इसके इस्तेमाल को लेकर अमेरिका में राजनीतिक और नैतिक बहस भी तेज हो गई है।
AI कैसे सैन्य विश्लेषकों को दे रहा है युद्ध रणनीति बनाने में मदद
रिपोर्ट के मुताबिक, पलान्टिर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े भाषा मॉडल जैसे क्लाउड को रक्षा डेटा सिस्टम से जोड़ा गया है। इससे सैन्य विश्लेषक चैट इंटरफेस के जरिए सीधे सवाल पूछ सकते हैं और AI उनके लिए डेटा का विश्लेषण कर संभावित निष्कर्ष दे सकता है।
उदाहरण के तौर पर यदि रडार या सैटेलाइट तस्वीरों में दुश्मन की असामान्य गतिविधि दिखाई देती है, तो सिस्टम विश्लेषक को अलर्ट भेजता है। इसके बाद विश्लेषक AI से पूछ सकता है कि वहाँ किस प्रकार की सैन्य इकाई मौजूद हो सकती है। AI उपलब्ध उपकरणों और पैटर्न के आधार पर अनुमान लगाकर बता सकता है कि यह किसी बख्तरबंद बटालियन की गतिविधि हो सकती है।
इसके बाद विश्लेषक AI से संभावित जवाबी कार्रवाई यानी कोर्स ऑफ एक्शन तैयार करने को कह सकता है। चैटबॉट कई विकल्प सुझा सकता है जैसे एयरस्ट्राइक करना, लंबी दूरी की तोपों से हमला करना या जमीनी सैनिकों की छोटी टुकड़ी भेजना। अंतिम निर्णय सैन्य कमांडर की मंजूरी के बाद ही लिया जाता है।
यह सिस्टम सैनिकों के लिए संभावित मार्ग तय करने, दुश्मन के संचार को बाधित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरण लगाने और डिजिटल मैप पर रणनीति तैयार करने जैसे काम भी कर सकता है। पालनतिर का यह सिस्टम अमेरिकी सैन्य कार्यक्रम प्रोजेक्ट मैवन से भी जुड़ा है, जिसमें AI का इस्तेमाल खुफिया विश्लेषण के लिए किया जाता है।
AI के इस्तेमाल पर उठ रहे सवाल और सुरक्षा चिंताएँ
हालाँकि सेना में AI के बढ़ते उपयोग को लेकर कई सांसद और विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि AI सिस्टम पूरी तरह भरोसेमंद नहीं हैं और कभी-कभी गलत या काल्पनिक जानकारी भी दे सकते हैं।
AI कंपनी अँठरोपिक ने भी अमेरिकी सरकार को अपने क्लाउड मॉडल तक पूरी तरह खुली पहुँच देने से इनकार किया था। कंपनी का कहना था कि उसकी तकनीक का इस्तेमाल अमेरिकी नागरिकों की निगरानी या पूरी तरह खुद से चलने वाले घातक हथियारों के लिए नहीं होना चाहिए। इसके बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने अँठरोपिक के उत्पादों को सप्लाई चेन जोखिम बताया, जिस पर कंपनी ने कानूनी चुनौती दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के फैसले पूरी तरह AI पर नहीं छोड़े जा सकते। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का भी दावा है कि अंतिम निर्णय हमेशा इंसानों द्वारा ही लिया जाता है।
इसके बावजूद कई सांसदों का मानना है कि AI की मदद से लक्ष्य चुनने और हमले की योजना बनाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, लेकिन इसके लिए सख्त नियम और पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि गलत फैसले का असर सैनिकों और आम नागरिकों दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

