लोकसभा में मंगलवार (17 मार्च 2026) को एक बड़ी राहत के साथ विपक्ष के 8 सांसदों का निलंबन वापस ले लिया गया है। निलंबित किए गए सांसदों में कॉन्ग्रेस के 7 और लेफ्ट का 1 सांसद शामिल है।
इन सभी को 4 फरवरी को पूरे बजट सत्र के लिए सस्पेंड किया गया था। सदन में कॉन्ग्रेस सांसद के सुरेश द्वारा रखे गए प्रस्ताव को ध्वनि मत से पास कर दिया गया, जिसके बाद ये सांसद वापस सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे।
इन शर्तों पर बनी वापसी की सहमति
सांसदों की वापसी के लिए कुछ सख्त शर्तें तय की गई हैं। समझौते के तहत विपक्ष अब सदन में बेबुनियाद और तथ्यहीन बयानबाजी नहीं करेगा। साथ ही, सांसद सदन के ‘वेल’ (बीच का हिस्सा) में जाकर हंगामा नहीं करेंगे, अधिकारियों के साथ अभद्रता नहीं करेंगे और लोकसभा की मेज पर चढ़कर उत्पात नहीं मचाएँगे। सांसदों को लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखने की हिदायत दी गई है।
आज सभी कॉंग्रेस पार्टी के सांसदों का निलंबन शायद वापस होगा ,पहला समझौता हुआ कि विपक्ष के नेता अनर्गल, बेबुनियाद,तथ्यहीन,बकवास बातें सदन में नहीं करेंगे,उसके बदले मैं शांतिपूर्ण व्यवहार करूँगा ।दूसरा वेल में विपक्ष के सांसद सत्ता पक्ष की तरफ़ नहीं जाएँगे,काग़ज़ नहीं… pic.twitter.com/R9sDpIctI1
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) March 17, 2026
इन सांसदों पर आरोप था कि इन्होंने पूर्वी लद्दाख के मुद्दे पर हंगामे के दौरान पीठासीन अधिकारी की कुर्सी की ओर कागज फेंके थे। इस मामले में सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सदन की मर्यादा बनाए रखने की बात कही। कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों को विशेष रूप से प्लेकार्ड और AI से बनी तस्वीरों का प्रदर्शन न करने की सख्त चेतावनी दी है।

