चीफ जस्टिस विभु बखरू और जस्टिस सी.एम. पूनाचा की खंडपीठ ने यह निर्देश जारी किया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि इस मामले में 74 अप्राकृतिक मौतें हुई हैं और पुलिस ने BNSS की धारा 194 (CrPC की धारा 174(3)) के अनुसार जाँच की प्रक्रिया और पोस्टमॉर्टम का पालन नहीं किया।
राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि 2010 से पहले धर्मस्थल में हुई अप्राकृतिक मौतों से जुड़े पुलिस रिकॉर्ड एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिए गए थे। यह एक सरकारी सर्कुलर के बाद किया गया था, जिसमें पुराने रिकॉर्ड को नष्ट करने की अनुमति दी गई थी।
हालाँकि, राज्य सरकार ने कहा कि 2010 के बाद के रिकॉर्ड अभी भी उपलब्ध हैं, और अधिकारियों के पास उस अवधि के बाद धर्मस्थल में दर्ज अप्राकृतिक मौतों का विवरण मौजूद है।
राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यह जनहित याचिका (PIL) बहुत देर से यानी कथित घटनाओं के लगभग 20 साल बाद दायर की गई थी। राज्य सरकार ने याचिका दायर करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। राज्य सरकार ने आगे कहा कि उसने शवों के अवशेषों को बरामद करने के प्रयास किए थे, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में एक विशेष जाँच दल (SIT) के लिए ‘रिट ऑफ मैंडमस’ की माँग की गई, ताकि 74 अलग-अलग FIR दर्ज की जा सकें। हर मामले के लिए एक FIR की जाए। याचिका पर सुनवाई के बाद, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह जाँच के महत्वपूर्ण तथ्यों का विस्तृत रिपोर्ट अदालत को दें।
धर्मस्थल मामला क्या है?
यह मामला पिछले साल तब सामने आया, जब धर्मस्थल में भगवान मंजुनाथ मंदिर में काम करने वाले एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने कहा कि उसे धर्मस्थल में महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था।
‘नकाबपोश आदमी’ ने आरोप लगाया था कि 1995 और 2014 के बीच धर्मस्थल में कथित तौर पर मारे जाने के बाद उसे बड़ी संख्या में युवतियों और नाबालिग लड़कियों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। पुलिस ने 3 जून, 2025 को एक FIR दर्ज की।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, कर्नाटक सरकार ने 19 जुलाई, 2025 को इस मामले की जाँच के लिए एक SIT गठित करने का आदेश दिया। ‘नकाबपोश आदमी’ ने SIT को 13 ‘दफन स्थलों’ की जगहें बताईं, और SIT ने उन जगहों पर खुदाई शुरू कर दी। जैसे-जैसे SIT ने एक-एक करके उन जगहों की खुदाई की, लेकिन उन जगहों पर कुछ भी नहीं मिला।
17 जगहों की खुदाई करने के बाद भी कुछ न मिलने पर SIT ने बचे जगहों की खुदाई न करने का फैसला किया। 23 अगस्त, 2025 को SIT ने उस आदमी को पुलिस को गुमराह करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
दिसंबर 2025 में, SIT ने कर्नाटक की बेल्टंगडी अदालत में अपनी शिकायत रिपोर्ट पेश की, जिसमें पूरे मामले को धर्मस्थल-विरोधी कार्यकर्ताओं द्वारा मनगढ़ंत बताया गया। SIT ने छह लोगों पूर्व कर्मचारी चिन्नैया को मुख्य आरोपी और महेश शेट्टी तिमरोडी, गिरीश मट्टन्ननवर, जयंत, विट्ठल गौड़ा और सुजाता भट्ट को आरोपी बनाया।
SIT ने कहा कि आरोपियों को झूठे बयान देने के लिए पैसे दिए गए, उन पर दबाव डाला गया और उन्हें ट्रेनिंग दी गई। SIT ने मजिस्ट्रेट के सामने कहा कि नकाबपोश आदमी ने कबूल किया है कि तिमरोडी और अन्य कार्यकर्ताओं ने उसे ‘झूठे’ दावे करने के लिए मजबूर किया था।

