उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक गाँव की 120 साल पुरानी मस्जिद में नमाज अदा करने को लेकर विवाद सामने आया है। धुन्ना समुदाय के एक मुस्लिम परिवार ने आरोप लगाया है कि तुर्क समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें जुमे की नमाज पढ़ने से रोक दिया। शिकायत के बाद पुलिस ने पाँच नामजद आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें न केवल मस्जिद में प्रवेश से रोका गया, बल्कि सामाजिक बहिष्कार, जान से मारने की धमकियाँ और गाँव छोड़ने का दबाव भी बनाया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामला मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है और निष्पक्ष जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
SP से शिकायत, मस्जिद में नमाज से रोकने और धमकाने का आरोप
मामला ऐंचौड़ा कंबोह थाना क्षेत्र के मंडली समसपुर गाँव का है। गाँव निवासी मोहम्मद वसीम ने शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि तुर्क समुदाय से जुड़े मस्जिद के मुतवल्ली अतीक अहमद, शाने आलम, आमिर, भोलू और हाफिज मारूफ ने उन्हें और उनके परिवार को गाँव की 120 साल पुरानी मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने से रोक दिया।
शिकायत में कहा गया है कि 3 जुलाई 2026 से उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा है। उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं और गाँव छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। वसीम ने अपनी शिकायत में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के चलते उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, इसलिए प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे।
#WATCH | Sambhal, UP: On a man alleging that people from the Turk community are preventing them from offering prayers at a mosque, SP Sambhal KK Bishnoi says, "A man named Mohammad Wasim belongs to the Dhunna community. He came to the district headquarters today and submitted an… pic.twitter.com/2cJB6oD54e
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) July 25, 2026
छह वक्त की नमाज, अजान और मस्जिद के प्रबंधन को लेकर बढ़ा विवाद
मोहम्मद वसीम का आरोप है कि गाँव की इस मस्जिद में पिछले 120 वर्षों से पाँच वक्त की नमाज अदा की जा रही थी, लेकिन अब तुर्क समुदाय के लोगों ने छह वक्त की नमाज की नई व्यवस्था लागू कर दी है। उनका कहना है कि जो लोग इस बदलाव का विरोध करते हैं, उन्हें मस्जिद में प्रवेश नहीं करने दिया जाता।
शिकायत में अजान देने की व्यवस्था, इमाम के भोजन के लिए होने वाले योगदान और चंदा संग्रह को लेकर भी मतभेद का जिक्र किया गया है। वसीम का कहना है कि वह देवबंदी विचारधारा से जुड़े हैं, जबकि दूसरी ओर के लोग बरेलवी परंपराओं को लागू करने का दबाव बना रहे हैं और पहले हुए समझौते का भी पालन नहीं कर रहे हैं।
यह विवाद पूरी तरह नया नहीं है। 26 जनवरी 2024 को तत्कालीन थाना प्रभारी की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ था। उस दौरान अजान, चंदा और इमाम के भोजन सहित कई व्यवस्थाओं को लेकर सहमति बनी थी। यह व्यवस्था करीब डेढ़ वर्ष तक चली, लेकिन बाद में दोनों पक्षों के बीच फिर मतभेद बढ़ गए और मामला दोबारा विवाद में बदल गया।
पुलिस ने दर्ज की FIR, जानिए क्या है गाँव की सामाजिक स्थिति
SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि मोहम्मद वसीम ने जिला मुख्यालय पहुँचकर शिकायत की थी कि उन्हें जुमे की नमाज अदा नहीं करने दी जा रही है। SP ने स्थानीय थाना प्रभारी को उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने और शिकायतकर्ता के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद पुलिस ने अतीक अहमद, शाने आलम, आमिर, भोलू और हाफिज मारूफ के खिलाफ FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि जाँच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 18 जुलाई 2026 को संभल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, “संभल में तुर्क की तुर्कई नहीं चलेगी, यहाँ हरिहर मंदिर का आदेश चलेगा।” मुख्यमंत्री के इस बयान के कुछ ही दिनों बाद यह विवाद सामने आया है।
गौरतलब है कि विवाद के केंद्र में मौजूद दोनों समुदायों की सामाजिक पृष्ठभूमि अलग-अलग है। धुन्ना (धुनिया) समुदाय को उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसे पसमांदा मुस्लिम समुदाय का हिस्सा माना जाता है। परंपरागत रूप से इस समुदाय का संबंध रूई की सफाई और प्रसंस्करण के कार्य से रहा है।
स्थानीय स्तर पर कई जगह इन्हें दलित मुस्लिम समुदाय के रूप में भी संबोधित किया जाता है। वहीं तुर्क समुदाय सामान्य वर्ग में आता है और अपनी जड़ें मध्य एशिया से आए तुर्क मूल के लोगों से जोड़ता है। मंडली समसपुर गाँव में धुन्ना समुदाय के केवल पाँच-छह परिवार रहते हैं, जबकि तुर्क समुदाय गाँव की लगभग 80 प्रतिशत आबादी है।
जिला प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी प्रकार का तनाव न बढ़े और सभी लोगों को बिना किसी बाधा के नमाज अदा करने का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।

