‘रूस कर रहा ईरान की खुफिया मदद’: यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का बड़ा दावा, कहा- सऊदी में US एयरबेस पर ईरानी हमले से पहले रूसी सैटेलाइट ने ली तस्वीरें

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि रूस ने सऊदी अरब स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे की हमले से पहले कई बार सैटेलाइट तस्वीरें ली थीं और संभव है कि यह जानकारी ईरान के साथ साझा की गई हो।

यह बात उन्होंने खाड़ी देशों के दौरे के दौरान दिए एक इंटरव्यू में कही, जिसमें उन्होंने रूस-ईरान के संभावित सैन्य सहयोग पर गंभीर चिंता जताई। जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में यह सामने आया है कि रूस के सैटेलाइट ने सऊदी अरब के रणनीतिक ठिकाने प्रिंस सुल्तान एयरबेस की 20 मार्च, 23 मार्च और 25 मार्च 2026 को तस्वीरें ली थीं।

इसके ठीक एक दिन बाद 26 मार्च 2026 को इस एयरबेस पर हमला हुआ। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि किसी स्थान की बार-बार सैटेलाइट इमेजिंग हमले की तैयारी का संकेत होती है। पहली बार तस्वीर लेना तैयारी, दूसरी बार अभ्यास और तीसरी बार लेना आसन्न हमले की चेतावनी माना जाता है।

हालाँकि इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई प्रत्यक्ष सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 मार्च 2026 को हुए इस हमले में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया था। हमले में कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई गई।

यह एयरबेस अमेरिका और सऊदी अरब दोनों के लिए बेहद अहम रणनीतिक केंद्र है, जहाँ दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी रहती है।

रूस-ईरान सहयोग पर गहराती आशंका

इंटरव्यू में जेलेंस्की ने यह भी कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा है, ताकि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा सके। दूसरी ओर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं। हालाँकि उन्होंने दोनों देशों के बीच लंबे समय से सैन्य सहयोग होने की बात स्वीकार की है।

जेलेंस्की इस समय खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहाँ वे यूक्रेन की एयर डिफेंस तकनीक साझा करने के लिए समझौते करने में जुटे हैं। उन्होंने चिंता जताई है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण अमेरिका कहीं यूक्रेन को मिलने वाली सैन्य मदद में कटौती न कर दे। जेलेंस्की के मुताबिक, उनके देश की सुरक्षा के लिए पश्चिमी देशों से मिलने वाले हथियार बेहद जरूरी हैं।

जेलेंस्की का मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस क्षेत्र में लंबे युद्ध से फायदा उठा सकते हैं, क्योंकि इससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं और रूस को आर्थिक लाभ मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशें भी प्रभावित हो रही हैं।