पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सरकार ने शिक्षा का हाल बदहाल कर दिया है। साल 2011 में राज्य की सत्ता संभालने के बाद जनता को ममता बनर्जी ने वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी बनाने के सपने दिखाए। कुछ यूनिवर्सिटी बनी तो हैं, लेकिन जैसे-तैसे धक्का लगाकर संचालित की जा रही हैं।
दरअसल, पहली बार 2011 में राज्य की कमान संभालने के बाद ममता बनर्जी ने कहा था, “जब हम यहाँ शिकागो और हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटी बना सकते हैं, तो बंगाल के छात्र शिकागो और हार्वर्ड क्यों जाएँ?” सीएम ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी सरकार 16 नई यूनिवर्सिटी बनाएगी।
और साल 2017 और 2018 में ममता बनर्जी की सरकार ने 11 यूनिवर्सिटी स्थापित की, जो दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, बालुरघाट, मुर्शिदाबाद, हुगली, नादिया, उत्तर 24 परगना, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, हावड़ा और बीरभूम में 11 और यूनिवर्सिटी की स्थित हैं। लेकिन इनमें पढ़ाई तब शुरू हुई, जब साल 2021 में राज्य चुनाव होने थे। लेकिन इनको वैधानिक मान्यता दिलवाने में सरकार ने समय लगाया।
इसी साल 2026 में दार्जिलिंग हिल यूनिवर्सिटी को छोड़ बाकी सभी यूनिवर्सिटी को वैधानिक मान्यता प्राप्त हुई। यानी 2011 में वर्ल्ड क्लास शिक्षा के सपने दिखाने वाली ममता बनर्जी को 15 साल का समय लगा, वो भी तब जब इस पूरी अवधि में राज्य में उन्हीं की सरकार सत्ता में थी।
इंडियन एक्सप्रेस ने इन सभी 11 यूनिवर्सिटी का दौरा किया और पाया कि 7 यूनिवर्सिटी अभी भी अस्थायी परिसरों से संचालित हो रही हैं, किसी में भी स्थायी शिक्षक नहीं हैं और अधिकांश यूनिवर्सिटीज UGC द्वारा निर्धारित 500 रुपए प्रति कक्षा की दर पर काम करने वाला गेस्ट लेक्चर पर निर्भर हैं। कई यूनिवर्सिटीज में छात्रों की संख्या घट रही है।
बंगाल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर ममता सरकार बैकफुट पर है। सरकार शिक्षक भर्ती घोटाले में घिरी हुई है। सीएम ममता बनर्जी और तत्कालीन राज्यपाल सीवी आनंद बोस के बीच विवाद के चलते 2023 और 2024 में नियुक्तियाँ रुकी रहीं। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद कुलपति के पद भरे गए और उन्हें वैधानिक दर्जा मिला।
उधर, वर्ल्ड क्लास शिक्षा के सपने दिखाने वाली ममता बनर्जी ने 2025-26 के बजट में शिक्षा क्षेत्र को सबसे कम हिस्सा दिया। इससे साफ है कि ममता बनर्जी केवल सपने दिखाना जानती है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बंगाल में आज भी शिक्षा बेहतर नहीं हो सकी है, पढ़ाई के लिए छात्र दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं।

