मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर मंदिर और मस्जिद पर चल रहे विवाद पर बुधवार (01 अप्रैल 2026) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता मुस्लिम पक्ष को वापस हाई कोर्ट जाने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने मुस्लिम पक्ष कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए साफ कहा कि इस बात पर कोई शक नहीं है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट मस्जिद प्रबंधन की आपत्तियों पर जरूर विचार करेगा। ये आपत्तियाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराए गए सर्वे की वीडियोग्राफी में दर्ज की गई हैं।
मुस्लिम पक्ष ने माँग की थी कि ASI सर्वे से जुड़ी वीडियोग्राफी और फोटो रिकॉर्ड पेश किए जाएँ। हालाँकि, हाई कोर्ट ने इस आवेदन पर तुरंत सुनवाई करने के बजाए कहा कि इसे अंतिम सुनवाई 02 अप्रैल 2026 के समय देखा जाएगा।
हाई कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट से 01 अप्रैल 2026 को सुनवाई करने की माँग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले का साथ दिया और कहा का हाई कोर्ट इस मामले में मस्जिद पक्ष की आपत्तियों पर उछित समय पर विचार करेगा।
सर्वे की वीडियोग्राफी और प्रक्रिया पर उठाए सवाल
विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भोजशाला परिसर में किए जा रहे वैज्ञानिक सर्वे से जुड़ा है। सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद के अनुसार, 11 मार्च 2026 को उन्होंने सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की माँग की थी, लेकिन 16 मार्च 2026 की सुनवाई में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई और कोई स्पष्ट आदेश भी जारी नहीं किया गया।
दूसरी ओर हाई कोर्ट के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी ने हाल ही में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्थल का निरीक्षण किया और ASI अधिकारियों से सर्वे की प्रगति के साथ-साथ वहाँ पूजा और नमाज की व्यवस्थाओं को लेकर भी जानकारी ली।
कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा दायर मूल याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि यह याचिका सुनवाई के योग्य नहीं है, फिर भी इस पर लगातार सुनवाई हो रही है। अब 2 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम है, जिसमें ऐतिहासिक तथ्यों और ASI की प्रारंभिक रिपोर्ट पर चर्चा हो सकती है।

