बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत महिलाएँ नेताओं के कमरे में गए बिना राजनीति नहीं कर सकती हैं। पप्पू यादव के इस बयान पर महिला आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। महिला आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब माँगा है।
Taking a suo motu cognisance, Bihar State Women's Commission issues a notice to Independent MP Pappu Yadav over his statement on women. The Commission has sought his response within 3 days, asking why he made the statement and why his Lok Sabha membership should not be cancelled. https://t.co/AhuA9P87yg pic.twitter.com/7qA0c8w1PZ
— ANI (@ANI) April 21, 2026
दरअसल, संसद में पेश किए गए महिला आरक्षण विधेयक को लेकर मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा और गरिमा की सारी बातें केवल एक दिखावा हैं। उन्होंने कहा, ” नेताओं के रूम में गए बिना 90 प्रतिशत महिलाएँ राजनीति कर ही नहीं सकतीं। बिना किसी प्रभावशाली नेता के बेडरूम तक पहुँचे महिलाओं का राजनीतिक करियर शुरू ही नहीं होता। आज औरत को नोंचने की संस्कृति बन गई है।”
पप्पू यादव का महिलाओं को लेकर यह आपत्तिजनक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बिहार महिला आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस भेजकर जवाब माँगा। नोटिस में कहा गया कि पप्पू यादव का बयान महिलाओं के आत्म-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुँचाता है।
महिला आयोग ने पप्पू यादव से किए ये सवाल
नोटिस में पप्पू यादव से कुछ सवाल के जवाब माँगे गए हैं, जिसमें, पप्पू यादव ने 90 प्रतिशत के इस आँकड़े का आधार क्या रखा है? किस प्रमाण के आधार पर पप्पू यादव ने महिला नेताओं के चरित्र पर सवाल उठाया? सार्वजनिक जीवन में एक सांसद जैसे गरिमामय पद पर रहते हुए ऐसी भाषा का प्रयोग करना क्या महिलाओं के अपमान की श्रेणी में नहीं आता?
महिला आयोग ने पप्पू यादव से आगे यह भी पूछा है कि इस अपमानजनक टिप्पणी के मद्देनजर लोकसभा अध्यक्ष से आपकी सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश क्यों नहीं की जानी चाहिए?

