दिल्ली हिंदू विरोधी दंगा: हाईकोर्ट ने पूर्व कॉन्ग्रेस पार्षद इशरत जहाँ की जमानत के खिलाफ पुलिस की अपील की खारिज, UAPA के तहत हैं आरोप

दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में शुक्रवार (24 अप्रैल 2025) को पूर्व कॉन्ग्रेस पार्षद इशरत जहाँ को मिली जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज कर दी। इशरत जहाँ पर 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में भूमिका को लेकर UAPA के तहत आरोप लगे थे। इशरत को 2022 में दो साल जेल में रहने के बाद जमानत मिली थी।

दिल्ली पुलिस ने ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी जिसे जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वे ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने के इच्छुक नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि इशरत जहाँ को 4 साल पहले जमानत मिली थी और अब तक उनके जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि 2022 में जमानत देते समय शर्त रखी गई थी कि इशरत जहाँ बिना अनुमति दिल्ली से बाहर नहीं जा सकतीं। हालाँकि, 2024 में इस शर्त में बदलाव किया गया और इशरत को बिना अदालत की पूर्व अनुमति के पूरे भारत में यात्रा करने की छूट दे दी गई।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि इस मामले के गवाहों के अनुसार इशरत जहाँ की दंगों में स्पष्ट भूमिका थी। पुलिस का कहना था कि इशरत ने सिर्फ साजिश ही नहीं रची बल्कि हिंसा के लिए फंडिंग भी की। पुलिस ने यह भी कहा था कि इशरत जहाँ पर UAPA की धारा 18 के तहत आरोप हैं जिसमें सिर्फ आतंकी साजिश ही नहीं बल्कि आतंकी कृत्य को अंजाम देने की कोशिश, उकसाने, निर्देश देने या उसे संभव बनाने जैसे आरोप शामिल हैं।

दिल्ली पुलिस की अपील में यह भी कहा गया था कि ये दंगे अचानक नहीं हुए थे बल्कि पहले से योजनाबद्ध थे और कई स्तरों और संगठनों के जरिए इन्हें अंजाम दिया गया। इशरत जहाँ पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से रोकने वाले अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत भी आरोप हैं। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए कहा था कि वे हिंसा भड़काने वाले वॉट्सऐप ग्रुप का हिस्सा नहीं थीं और हिंसा में शामिल किसी संगठन की सदस्य भी नहीं पाई गई थीं।