पाकिस्तान में अहमदियों को बकरीद पर बकरे की कुर्बानी देने का भी नहीं अधिकार? घर जाकर जानवर जब्त करने में लगी पुलिस: रिपोर्ट

पाकिस्तान के कराची में अल्पसंख्यक अहमदिया मुस्लिम समुदाय ने आरोप लगाया कि बकरीद से पहले पुलिस उनके कुर्बानी के जानवर जब्त कर रही है। समुदाय के प्रतिनिधि अमीर महमूद ने कहा कि अहमदियों को भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कराची के मलिर इलाके में पुलिसकर्मियों को एक बकरी वाहन में ले जाते हुए दिखाया गया। दावा किया गया कि वह जानवर एक अहमदी परिवार का था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महमूद ने बताया कि कराची में समुदायद के लोगों के लिए बकरीद से पहले कुर्बानी के जानवर खरीदना और उन्हें घरों में रखना मुश्किल हो गया है, क्योंकि पुलिस डराने-धमकाने की कार्रवाई कर रही है। महमूद के अनुसार, शहर के कई इलाकों में पुलिस अहमदियों के जानवर ‘गैर-कानूनी तरीके’ से जब्त कर रही है। महमूद ने कहा कि पाकिस्तान अहमदियों को मुस्लिम नहीं मानता, इसलिए उन्हें बकरीद पर कुर्बानी करने की अनुमति भी नहीं दी जाती।

बता दें कि पाकिस्तान की संसद ने 1974 में संवैधानिक संशोधन के जरिए अहमदियों को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था। इसके बाद 1984 में तत्कालीन पाकिस्तानी फौज के प्रमुख मोहम्मद जिया-उल-हक के शासन में ऐसे कानून बनाए गए, जिनके तहत अहमदियों का खुद को मुस्लिम कहना या अपनी इबादतगाह को मस्जिद बताना अपराध माना गया।

बता दें कि अहमदी समुदाय का मानना मुख्यधारा के मुस्लिमों से अलग है। जहाँ ज्यादातर मुस्लिम पैगंबर मोहम्मद को अंतिम पैगंबर मानते हैं, वहीं अहमदी समुदाय अपने मिर्जा गुलाम अहमद को सुधारक और पैगंबर मानता है।