भारत में तैयार किए गए पहले C-295 सैन्य परिवहन विमान ने गुजरात के वडोदरा स्थित फाइनल असेंबली लाइन से अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली है। इसे भारत के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह विमान टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एयरबस की साझेदारी में बनाया गया है। इस सफलता के साथ भारत में सैन्य विमान निर्माण की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को भी मजबूत करती है।
40 विमान भारत में बनेंगे, 2021 में हुआ था समझौता
एयरबस डिफेंस के अनुसार, पहली परीक्षण उड़ान विमान के उत्पादन के बाद होने वाली जाँच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत में बनने वाले 40 C-295 विमानों में पहला विमान है और इसे इसी साल भारतीय वायुसेना को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।
The Indian Air Force congratulates the entire team behind the successful maiden flight of the first India-made C-295.
— Indian Air Force (@IAF_MCC) June 10, 2026
The achievement reinforces India's growing aerospace capabilities and underscores the Indian Air Force commitment to fostering indigenous defence capability… pic.twitter.com/tsU0dQUdi5
भारत ने सितंबर 2021 में स्पेन के साथ 21935 करोड़ रुपए का समझौता किया था, जिसके तहत कुल 56 C-295 विमान खरीदे जा रहे हैं। इनमें से 16 विमान सीधे स्पेन से तैयार अवस्था में भेजे जा रहे हैं, जबकि बाकी 40 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। वडोदरा स्थित इस अत्याधुनिक प्लांट का उद्घाटन 28 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने किया था।
भारतीय वायुसेना ने भी इस उपलब्धि का स्वागत करते हुए पूरी टीम को बधाई दी है। वायुसेना ने कहा कि यह सफलता भारत की बढ़ती एयरोस्पेस क्षमताओं को दर्शाती है और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन के लक्ष्य को आगे बढ़ाती है।
पुराने Avro विमानों की जगह लेगा C-295, कई मिशनों में होगा उपयोग
C-295 एक मिडिल रेंज का रणनीति सैन्य परिवहन विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना के पुराने Avro-748 बेड़े की जगह शामिल किया जा रहा है। यह विमान सैनिकों की आवाजाही, सैन्य सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए, मेडिकल इवैक्यूएशन और विशेष अभियानों जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इस्तेमाल होगा।
इस विमान में एक बार में 70 सैनिक, 48 पैराट्रूपर या 24 मेडिकल स्ट्रेचर तक ले जाने की क्षमता है। इसमें दो प्रैट एंड व्हिटनी PW127G टर्बोप्रॉप इंजन लगाए गए हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग क्षमता है, जिसके कारण यह छोटे, ऊबड़-खाबड़ और अर्ध-तैयार हवाई पट्टियों से भी उड़ान भर सकता है।
यही वजह है कि यह विमान पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और दूर-दराज के सैन्य ठिकानों पर इस्तेमाल के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है।

