‘यूरोप के हथियारों से भारत पर हमला होता है’: रूसी तेल पर ज्ञान देने वाले पश्चिमी देशों को जयशंकर ने दिखाया आईना

विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले का मजबूती से बचाव किया है और पश्चिमी देशों की आलोचना पर सवाल उठाए हैं। यह पूरा मामला फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतारांता टॉक्स’ के दौरान सामने आया, जहाँ उनसे रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत की ऊर्जा नीति को लेकर सवाल पूछे गए। एक पत्रकार ने भारत पर आरोप लगाया कि वह रूस के प्रति ‘ज्यादा सहानुभूतिपूर्ण’ है और वहाँ से तेल खरीदकर उसका समर्थन कर रहा है।

भारत ने क्यों खरीदा रूस से तेल?

इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने साफ कहा कि भारत का फैसला पूरी तरह आर्थिक और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित था। उन्होंने कहा, “मैं तेल उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर खरीदता हूँ।”

उन्होंने समझाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तो यूरोप ने मिडिल ईस्ट से तेल खरीदना शुरू कर दिया, जो पहले भारत का पारंपरिक सोर्स था। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों के कारण भारत को रूस से सस्ता और अधिक तेल मिलना शुरू हुआ।

जयशंकर ने यह भी बताया कि 2022 में अमेरिका ने खुद भारत से कहा था कि वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने के लिए रूस से तेल खरीदा जाए, ताकि महँगाई अचानक न बढ़े। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और इसी आधार पर निर्णय लिया है।

पश्चिमी देशों की दोहरी नीति पर सवाल

अपने बयान में विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों की नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यूरोप के किसी भी देश पर भारतीय हथियारों से हमला नहीं हुआ, लेकिन यूरोप कई देशों को हथियार बेचता है जिनका इस्तेमाल संघर्षों में होता है।

उन्होंने कहा, “यूरोप हथियार बेचता है, जिनका उपयोग हम पर भी हुआ है। भारत ने कभी यूरोप के लिए कोई खतरा नहीं पैदा किया।” जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि अमेरिका गैस का प्रमुख सप्लायर है।

उन्होंने वैश्विक नीति को डीरिस्किंग की दिशा में बताया और कहा कि आज ऊर्जा बाजार पूरी तरह बदल चुका है। भारत ने साफ किया है कि वह किसी भी प्रतिबंध का हिस्सा नहीं है और अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले लेता रहेगा।