ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने रविवार को संभावित समझौते पर हस्ताक्षर करने की बात से इनकार किया है। उन्होंने ट्रंप की ‘जिद’ की आलोचना करते हुए कहा कि समझौते का ढाँचा अभी तक तय नहीं हुआ है, हालाँकि यह भी संकेत दिया है कि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत होने के करीब हैं।
CNN के अनुसार, ईरान ने समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है और इसमें क्या-क्या शामिल होगा इस पर भी असमंजस बरकरार है। CNN ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अधिकारी वर्चुअल तरीके से हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि आमने-सामने मिलने में लॉजिस्टिकल चुनौतियां थीं और पूरी प्रक्रिया में देरी होने की संभावना अधिक थी, इसलिए आमने-सामने की बैठक की योजना रद्द कर दी गई है।
अब इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर यानी वर्चुअल डील होगी। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा है कि इस समझौते से बातचीत का 60 दिन का नया दौर शुरू होगा, जिसमें ढाँचे को लागू करने और बाकी मुद्दों को सुलझाने पर चर्चा होगी।
हालाँकि शर्तों को लेकर ईरान जो कह रहा है और अमेरिका ने जो जानकारी दी है, उसमें अंतर है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप और ईरान के अमेरिका और दूसरे दूसरे देशों में सील किए गए फंड जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।

